प्राचीन नरसिंह मंदिर में चार दिवसीय प्राकट्य उत्सव का भव्य शुभारंभ
भगवान नरसिंह के चार दिवसीय महोत्सव के पहले दिन विशेष अनुष्ठान और ध्वजारोहण किया गया, 30 अप्रैल को छप्पन भोग के साथ होगा समापन।

शहर के प्राचीन नरसिंह मंदिर में महोत्सव के पहले दिन पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु और मंदिर के सेवादार।
शहर के प्राचीन नरसिंह मंदिर में भगवान नरसिंह के चार दिवसीय प्राकट्य उत्सव (नरसिंह जयंती महोत्सव) का शुभारंभ सोमवार को भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार के इस महोत्सव के प्रथम दिन मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के शिखर पर पारंपरिक विधि से पताका फहराकर की गई। भगवान का दिव्य स्वरूप और मंदिर की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। सुबह से ही विशेष अभिषेक और आरती का क्रम प्रारंभ हुआ, जहां भक्तों के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
मंदिर के पुजारी मयंक शर्मा ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए स्तंभ फाड़कर नरसिंह अवतार धारण किया था। उन्होंने बताया कि भगवान नरसिंह शक्ति और सुरक्षा के देवता हैं और जो भी भक्त श्रद्धा एवं व्रत के साथ उनकी आराधना करता है, उसके जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान ने असुर राज हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद की रक्षा की और सृष्टि को पाप एवं अत्याचार से मुक्त कराया।
आयोजन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक संजय गोयल, भुवनेश गहलोत, मुकेश सोनी, हिमांशु शर्मा, पेरख गौतम और सुरेश नायक सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।
पुजारी मयंक शर्मा के अनुसार यह महोत्सव आगामी चार दिनों तक निरंतर चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन भजन संध्या, महाआरती और विशेष झांकियों के दर्शन होंगे। 28 अप्रैल को मंदिर में विशेष ध्वजा पूजन होगा तथा भक्तों को मोर पंख के दुर्लभ दर्शन कराए जाएंगे। 29 अप्रैल को भगवान का पंचामृत स्नान कराया जाएगा और मंदिर परिसर में रामायण पाठ का आयोजन होगा। मुख्य उत्सव 30 अप्रैल को प्रातः 7 बजे पंचामृत से महाअभिषेक के साथ प्रारंभ होगा, जिसके बाद सुबह 8 बजे भगवान का श्रृंगार किया जाएगा।
मुख्य आकर्षण के रूप में भगवान का दिव्य ‘फूल बंगला’ और मुखौटा दर्शन सुबह 11 बजे से श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेगा। दोपहर 12 बजे विशेष आरती आयोजित की जाएगी, जिसके उपरांत श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर से ‘रक्षा कवच’ वितरित किए जाएंगे। महोत्सव का समापन सायं 7 बजे 101 बत्तियों से महाआरती और भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर महाप्रसाद वितरण के साथ होगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष केंद्र बनेगा।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
