कोटा। श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, तलवंडी में अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर मंगलवार को 8 दिवसीय नंदीश्वर दीप महामंडल विधान एवं विश्व शांति कल्याण महायज्ञ का भव्य शुभारंभ ध्वजारोहण, घटयात्रा एवं मंडल शुद्धिकरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन श्री आदि कुमार भैयाजी के निर्देशन में संपन्न हुआ।


अष्टान्हिका महापर्व एवं नंदीश्वर द्वीप का महत्व

तलवंडी मंदिर समिति के महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि आत्म शुद्धि एवं सिद्धों की आराधना के इस महापर्व में श्रद्धालु भावपूर्वक पूजा-अर्चना कर आत्मकल्याण का संकल्प ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि:

"जैन दर्शन के अनुसार अष्टान्हिका महापर्व हमें नंदीश्वर द्वीप की दिव्य कल्पना से जोड़ता है, जहां 52 अकृत्रिम जिनालयों में देवगण प्रभु की आराधना करते हैं। इसी भाव से पृथ्वी लोक पर श्रद्धालु विधान कर पुण्यार्जन करते हैं।"

आचार्यों के मतानुसार, जो भी भव्य जीव अष्टान्हिका महापर्व में सच्चे भावों से प्रभु पूजन करता है, वह अल्प भवों में मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है।


प्रथम दिवस के मुख्य पुण्यार्जक एवं सहभागी

कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर विभिन्न धार्मिक क्रियाओं का सौभाग्य इन परिवारों को प्राप्त हुआ:

  • ध्वजारोहण: सुरेश निर्मल हरसौरा।
  • सोधर्म इंद्र: अजय जैन एवं सीए उपेंद्र अजमेर।
  • द्रव्य पुण्यार्जक: राजीव एवं भारती सेठी।
  • अखंड ज्योति स्थापना: प्रकाश चंद्र एवं सुनीता सामरिया।
  • मुख्य कलश स्थापना: अजय जैन एवं निकलेश परिवार।
  • चार मंगल कलश एवं अष्ट प्रातिहार्य स्थापना: सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा।

आध्यात्मिक संदेश एवं आयोजन की रूपरेखा

श्री आदि कुमार भैया जी ने नंदीश्वर दीप विधान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि:

"यह विधान आत्मशुद्धि, तप एवं आराधना का अनुपम अवसर है, जो साधकों को आत्मचिंतन एवं मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित करता है।"

मंदिर समिति के अध्यक्ष अशोक पहाड़िया ने बताया कि यह आठ दिवसीय आयोजन निरंतर चलेगा, जिसमें प्रतिदिन नंदीश्वर विधान, विश्व शांति महायज्ञ एवं श्रावकों द्वारा तप-आराधना संपन्न होगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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