निर्यापक मुनि योग सागर जी महाराज ने कोटा में दिया सम्यक दृष्टि का संदेश
कोटा के नसिया जी दादाबाड़ी में मुनि योग सागर जी महाराज ने मिथ्या दृष्टि त्यागने और आत्मकल्याण हेतु परिणामों की शुद्धि पर जोर दिया।

कोटा के पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसिया जी दादाबाड़ी में धर्मसभा को संबोधित करते निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज।
कोटा | 11 फ़रवरी 2026: पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसिया जी दादाबाड़ी के अध्यक्ष श्री जम्बू जैन सर्राफ ने जानकारी देते हुए बताया कि आज प्रातः 9 बजे, ज्येष्ठ श्रेष्ठ निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज की भक्ति-भाव से पूजा संपन्न हुई। आहार एवं दर्शन हेतु श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
उद्घाटन एवं शास्त्र भेंट समारोह
उपाध्यक्ष श्री सुमित सैंन्की ने बताया कि तत्पश्चात पुण्यार्जक परिवार — पदम जी, राजेंद्र जी, हुकम जी काका, प्रकाश जी हरसौरा परिवार द्वारा आचार्य श्री के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट किया। इसके पश्चात 21 श्रेष्ठी परिवारों द्वारा महा मुनिराज निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज एवं मुनि 108 श्री निर्मोह सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट किए गए।
मुनि श्री योग सागर जी महाराज का मंगल प्रवचन
शुभम शास्त्री ने बताया कि धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज ने कहा कि:
"इस त्रिलोक में मिथ्या दृष्टि जीव असंख्य हैं, जो अवगुणों को भी गुण समझ लेते हैं। पराई वस्तु भी उन्हें अपनी प्रतीत होती है और दूसरों पर दोषारोपण करना वे अपनी शान मानते हैं।"
एक उदाहरण देते हुए आपने कहा कि रावण पराक्रमी और महाज्ञानी होते हुए भी दृष्टि में विसंगति आने से पतन को प्राप्त हुआ। आपने कहा कि:
"हमें सम्यक दृष्टि बनने का प्रयास करना चाहिए, जहाँ “अपना सो अपना, तेरा सो तेरा” की भावना हो और किसी पर हावी होने की प्रवृत्ति न हो। आज हम राग-द्वेष में जी रहे हैं, जबकि इससे दूर रहना ही आत्मकल्याण का मार्ग है।"
धर्म-ध्यान भी कर्मों के उदय से ही प्राप्त होता है; परिणामों को शुद्ध कर कर्मों पर विजय प्राप्त करना ही साधना का लक्ष्य है।
मुनि श्री निर्मोह सागर जी महाराज के विचार
उपाध्यक्ष श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि प्रवचन से पूर्व मुनि 108 श्री निर्मोह सागर जी महाराज ने भगवान राम, माता सीता एवं लक्ष्मण के जीवन प्रसंग के माध्यम से गुरु सानिध्य एवं माता-पिता की आज्ञा पालन का महत्व बताया।
- आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके आदर्श सदैव हमें उनकी स्मृति कराते रहेंगे।
- आचार्य श्री के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक मुनि 108 श्री योग सागर जी महाराज ससंघ का 47 वर्षों बाद राजस्थान की धरती पर आगमन हम सभी के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है।
- "यदि चौका नहीं लगा सकें, तो भी एक ग्रास अर्पित कर देखिए — निश्चित ही कल्याण होगा।"
आहार चर्या एवं चौका व्यवस्था
महामंत्री श्री महेंद्र कासलीवाल एवं कोषाध्यक्ष श्री मनीष मोहिवाल ने जानकारी दी कि आज श्रावक-श्रेष्ठी परिवारों द्वारा कुल 21 चौके लगाए गए, जिनमें निम्न परिवारों को आहार दान का सौभाग्य प्राप्त हुआ:
- मुनि श्री योग सागर जी महाराज: वीरेंद्र, मनोज, रविंद्र, आदिनाथ परिवार।
- मुनि श्री निरोग सागर जी: विनोद मंजू पाटनी परिवार।
- मुनि श्री निर्मोह सागर जी: राजेंद्र जी, हुकम जी काका परिवार।
- मुनि श्री निर्भीक सागर जी: श्री जम्बू जी, रानी जैन, दिव्यांश, मुस्कान सर्राफ परिवार।
- मुनि श्री निरामय सागर जी: संतोष, आशीष, नेहा हरसौरा परिवार।
परोपकारी योजनाओं का अवलोकन
अर्चना (रानी) जैन सर्राफ ने बताया कि निर्यापक मुनि संघ नें क्षेत्र में चल रही सभी परोपकारी (नर सेवा नारायण सेवा) योजनाओं का अवलोकन किया और प्रसंशा करते हुये आशीर्वाद दिया।
कल प्रातः 9 बजे धर्मसभा पुनः पुण्योदय तीर्थ, नसिया जी दादाबाड़ी में आयोजित होगी।

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