कोटा: मुनि विश्वनायक सागर बोले- चेतना ही जीव का वास्तविक स्वरूप
कुन्हाड़ी स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा के दौरान मुनिश्री ने जीव-अजीव द्रव्य और भाषा संप्रेषण के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

तस्वीर में कोटा के मंदिर में जैन मुनि के चरण प्रक्षालन करते श्रद्धालु दिख रहे हैं।
कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मासिक प्रवास के दौरान धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तक मुनि श्री विश्वनायक सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने भीतर विद्यमान चेतना को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। जो चेतना से युक्त है, वही जीव तत्व है। आत्मा का स्वरूप चेतन है, जबकि संसार की अन्य वस्तुएं अजीव तत्व के अंतर्गत आती हैं।
मुनिश्री ने कहा कि जैन दर्शन में जीव और अजीव को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। संसार में दिखाई देने वाले पदार्थों और उनकी विभिन्न अवस्थाओं को समझने के लिए द्रव्य और पर्याय का ज्ञान आवश्यक है। आचार्य भगवान ने द्रव्य के छह भेद बताए हैं, जिनमें जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल शामिल हैं। इनमें जीव चेतन द्रव्य है, जबकि शेष अजीव द्रव्य हैं।
उन्होंने कहा कि जीव अपनी पर्यायों के माध्यम से संसार में विभिन्न अवस्थाओं को प्राप्त करता है। सांसारी जीव अपनी विकारी परिणतियों के कारण जन्म-मरण के चक्र में भटकता रहता है। जब जीव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानकर सम्यक् परिणामों की ओर बढ़ता है, तभी आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
मुनिश्री ने भाषा के स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य अलग-अलग क्षेत्रों और परिस्थितियों में हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, संस्कृत आदि अनेक भाषाओं का प्रयोग करता है। भाषा के माध्यम से विचारों और भावों का आदान-प्रदान होता है। अक्षरों के माध्यम से व्यक्त होने वाली भाषा के साथ अनक्षर रूप में होने वाला संप्रेषण भी प्रकृति और जीव-जगत में दिखाई देता है। पक्षियों तथा अन्य जीवों के संकेत और ध्वनियां भी उनके संप्रेषण का माध्यम हैं।
धर्मसभा में सकल सामज के महामंत्री पदम बडला, मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड, टीकम पाटनी, कैलाश सोनी, संतोष डूंगरवाल, महेंद्र गोधा, वर्धमान खटोड़, आशीष साकुनीया, मनोज मित्तल, संजय खटोड़, जम्बू बज, विजय सेठी आदि उपस्थित रहे।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
