कोटा में मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश, जयघोषों और पुष्पवर्षा से गूंजा पूरा शहर
कोटा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज के ऐतिहासिक मंगल प्रवेश के दौरान हजारों श्रद्धालु उमड़े। 51 स्वागत द्वारों पर पुष्पवर्षा, भव्य शोभायात्रा, धर्मसभा और चातुर्मास की शुरुआत के बीच पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

तस्वीर में मुनि श्री योगसागर जी महाराज कोटा में मंगल प्रवेश यात्रा के दौरान भक्तों के साथ पैदल चलते हुए दिख रहे हैं।
कोटा, 19 जुलाई। "वंदे गुरुवर... जय-जय गुरुवर योगसागर... धर्मध्वजा के ध्वजवाहक... णमो अरिहंताणं... णमो सिद्धाणं... नमोस्तु गुरुवर..." के गगनभेदी जयघोषों के बीच रविवार को पूरा कोटा भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, लघु भ्राता एवं ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज का ऐतिहासिक एवं भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के अद्भुत संगम के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रातःकाल सीएडी सर्किल स्थित आचार्य श्री विद्यासागर जी कीर्ति विजय स्तंभ पर हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य गुरुवर की अगवानी के लिए एकत्रित हुए। जैसे ही श्रद्धालुओं ने गुरुवर के दर्शन किए, वे भाव-विभोर होकर उनके चरणों में श्रद्धा के पलक-पांवड़े बिछाने लगे। पूरे परिसर में भक्ति, विनय और उल्लास का वातावरण छा गया तथा सकल जैन समाज ने संतश्री की अगवानी की।
बैंड-बाजों, पारंपरिक मशक बाजा और मंगल धुनों के बीच प्रारम्भ हुई शोभायात्रा सीएडी सर्किल से रोटरी तिराहा, एस.एस. डेयरी, बड़ा चौराहा, अरिहंत प्लाजा, छोटा चौराहा, महावीर कॉम्प्लेक्स होते हुए श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी दादाबाड़ी पहुँची। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर संतश्री के दर्शन किए और पूरा मार्ग आध्यात्मिक आस्था के जीवंत तीर्थ में परिवर्तित हो गया।
मार्ग में बनाए गए 51 भव्य स्वागत द्वारों पर समाज की विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों ने पुष्पवर्षा कर मुनिसंघ का अभिनंदन किया। जगह-जगह ड्राई फ्रूट, मेवा, सेव, फल, केले, पेय पदार्थ तथा अन्य प्रभावना सामग्री श्रद्धालुओं में वितरित की गई। पूरा शहर "वंदे गुरुवर", "जय-जय गुरुदेव", "नमोस्तु गुरुवर" और "विद्यासागर गुरुवर अमर रहें" जैसे जयघोषों और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा। अनेक स्थानों पर लोगों ने अपने घरों की छतों और बालकनियों से भी पुष्पवर्षा कर संतश्री का स्वागत किया।
मंगल प्रवेश यात्रा में पाँच आकर्षक बैंड शामिल रहे, जिनमें भटिंडा (पंजाब) से आया विशेष बैंड, पारंपरिक मशक बाजा, जैन पाठशालाओं के बच्चों का बैंड, महिला मंडलों, विभिन्न जैन मंदिरों के श्रद्धालुओं तथा सकल जैन समाज की हजारों की संख्या में सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
मंदिर पहुँचने के बाद धर्मसभा में मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं शास्त्र भेंट का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। दीप प्रज्ज्वलन का सौभाग्य राजेश जी आनंद डायग्नोसिस परिवार को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने पूज्य मुनिश्री के दर्शन एवं आशीर्वचन का लाभ लिया।
पुण्योदय अतिशय क्षेत्र के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि मुनिसंघ के कोटा आगमन के साथ ही समिति एवं सकल जैन समाज ने श्रीफल अर्पित कर चातुर्मास का मंगल स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आगामी चार महीनों तक प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, सामायिक, आराधना, धर्मचर्चा एवं विविध धार्मिक कार्यक्रमों की अविरल श्रृंखला चलेगी, जिससे सम्पूर्ण हाड़ौती क्षेत्र धर्ममय वातावरण में आलोकित रहेगा।
निदेशक हुकम जैन 'काका' ने बताया कि शीघ्र ही मुनि श्री का आशीर्वाद लेकर भव्य चातुर्मास स्थापना कलश समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियाँ प्रारम्भ हो चुकी हैं।
महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने कहा कि पूज्य मुनिश्री के पावन सान्निध्य में समाज में धर्म, संस्कार और संयम की भावना का व्यापक प्रसार होगा। उनके प्रेरक प्रवचन समाज के प्रत्येक वर्ग को आध्यात्मिक उन्नयन एवं आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करेंगे।
प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना (रानी) जैन दुगेरिया सर्राफ ने बताया कि आयोजन में महिलाओं ने निर्धारित क्रीम रंग की लाल बॉर्डर वाली साड़ी तथा पुरुषों ने सफेद कुर्ता-पायजामा धारण कर अनुशासित एवं आकर्षक सहभागिता निभाई। विभिन्न महिला मंडलों के साथ संत सुधा सागर बालिका छात्रावास की छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक यात्रा में भाग लेकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
आशा श्रीमाल ने बताया कि पूज्य मुनिश्री की आहारचर्या श्री प्रकाश जी मड़िया के यहाँ तथा क्षुल्लक श्री जी की आहारचर्या श्री जयप्रकाश जी के यहाँ सम्पन्न हुई।
भक्ति, अनुशासन, संयम और श्रद्धा का यह अनुपम संगम वर्षों तक कोटा की धार्मिक चेतना में स्मरणीय रहेगा। पूज्य मुनिश्री के मंगल प्रवेश ने सम्पूर्ण नगर को धर्ममय बना दिया और यह ऐतिहासिक चातुर्मास आने वाले चार महीनों तक जन-जन में आध्यात्मिक जागरण, संयम और संस्कारों का संदेश प्रसारित करेगा।

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