व्रत, नियम और संयम से ही आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त, हेय-उपादेय का विवेक जरूरी
कोटा के नसियां जी में मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज ने हेय-उपादेय, व्रत, नियम और संयम को आत्मकल्याण व मोक्षमार्ग की पहली सीढ़ी बताया।

कोटा के दादाबाड़ी स्थित नसियां जी में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज।
कोटा, 30 अगस्त। श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में आयोजित धर्मसभा में ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज के संघस्थ मुनि श्री 108 प्रणवसागर जी महाराज ने आत्मकल्याण के लिए हेय–उपादेय के विवेक, व्रत, नियम और संयम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल सुख-सुविधाओं का संग्रह करना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण करते हुए मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना है।
मुनिश्री ने कहा कि कल्याण का मार्ग तभी प्रशस्त हो सकता है, जब मनुष्य को यह विवेक हो कि क्या छोड़ना है और क्या ग्रहण करना है। जैन दर्शन में हेय और उपादेय का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो आत्मा के लिए अहितकर है, वह हेय है और जो आत्मा के लिए हितकर है, वह उपादेय है। जब तक जीव संसार के आकर्षणों और आत्मकल्याण के साधनों के बीच अंतर नहीं समझेगा, तब तक वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता।
उन्होंने कहा कि केवल यह जान लेना पर्याप्त नहीं है कि मोक्ष श्रेष्ठ है, बल्कि मोक्ष तक पहुंचने वाले मार्ग को पहचानना और उस पर चलना भी आवश्यक है। आज मनुष्य सुख और शांति चाहता है, लेकिन अशांति एवं बंधन के कारणों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता। वह विषय-वासनाओं को उपादेय और संयम को कठिन समझने लगता है। यही गलत दृष्टि जीव को संसार में भटकाती रहती है। सबसे पहले विवेक जागृत करना आवश्यक है। जब जीव यह समझने लगता है कि कौन-सी प्रवृत्तियां आत्मा को बांधती हैं और कौन-सी आत्मा को शुद्धता की ओर ले जाती हैं, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत होती है।
मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज ने स्पष्ट किया कि मोक्षमार्ग केवल विचारों से निर्मित नहीं होता, बल्कि आचरण से प्रशस्त होता है। व्रत, नियम और संयम आत्मकल्याण के व्यवहारिक साधन हैं। जिस प्रकार मंजिल तक पहुंचने के लिए मार्ग पर चलना पड़ता है, उसी प्रकार मोक्ष की मंजिल तक पहुंचने के लिए संयममय जीवन का अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी प्रत्येक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार अणुव्रत और देशव्रत धारण कर सकता है। व्रत जीवन पर बंधन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले सुरक्षा-कवच हैं। ये मनुष्य को इच्छाओं का गुलाम बनने से रोकते हैं और आत्मा की ओर लौटने की प्रेरणा देते हैं।
मुनिश्री ने कहा कि संयम का अर्थ संसार से भाग जाना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए अपनी इन्द्रियों और इच्छाओं पर विजय प्राप्त करना है। जिसने अपने मन को साध लिया, उसके लिए बाहरी परिस्थितियां आत्मकल्याण के मार्ग में बड़ी बाधा नहीं बनतीं। संयम धीरे-धीरे जीवन की वृत्तियों को शुद्ध करता है और आत्मा को मोक्षमार्ग की ओर ले जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन स्वयं से पूछना चाहिए—“मैं क्या ग्रहण कर रहा हूं और क्या छोड़ रहा हूं? मेरी दिनचर्या मुझे आत्मा के निकट ले जा रही है या संसार के बंधनों में और अधिक बांध रही है?” उन्होंने कहा कि इन प्रश्नों का ईमानदारी से उत्तर देना ही आत्मजागरण की शुरुआत है।
मुनिश्री ने कहा कि हेय–उपादेय का विवेक, व्रत–नियम का पालन और संयम का आचरण—ये तीनों मिलकर जीवन को कल्याण की दिशा प्रदान करते हैं। केवल धर्म की बातें सुनने से जीवन में परिवर्तन नहीं आता; धर्म को अपने आचरण में उतारना आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि जीवन में कल्याण और मुक्ति की आकांक्षा है, तो इच्छाओं को मर्यादित करना होगा तथा हिंसा, असत्य, चोरी, कुशील और परिग्रह जैसी प्रवृत्तियों से स्वयं को बचाना होगा। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अणुव्रत, देशव्रत और संयम को जीवन का अंग बनाना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि मोक्ष कोई संयोग नहीं, बल्कि साधना का परिणाम है। हेय को छोड़ना और उपादेय को अपनाना उस साधना की शुरुआत है। जिस दिन मनुष्य यह समझ लेगा कि संसार में सब कुछ प्राप्त कर लेने से बड़ी उपलब्धि अपनी आत्मा को पहचानना और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना है, उसी दिन से उसका जीवन सच्चे अर्थों में मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर हो जाएगा।
धर्मसभा में आज के प्रमुख पुण्यार्जकों ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक पुण्यार्जन कर धर्मलाभ अर्जित किया। अध्यक्ष श्री जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि सम्यग्दर्शन–चारित्र भक्ति एवं चातुर्मास कलश स्थापना का पुण्यार्जन उषा दीदी, माताश्री विद्या जी जैन, चंद्रकला जी जैन, चांदखेड़ी द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ एवं उपाध्यक्ष श्री सुमित जैन ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन श्री हरीशचंद जी, श्री अनुराग जी, श्रीमती शालू जी, श्री आशीष जी, श्रीमती अनुषा जी, श्रीमती साक्षी जी, श्री हिमांश एवं समस्त टोंग्या परिवार, महावीर नगर विस्तार योजना, कोटा — श्रीमती साक्षी टोंग्या जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में तथा श्री पारस कुमार जी, श्रीमती चंद्रकला जी, श्री राजकुमार जी, श्रीमती मोनिका जी, कोटिया परिवार, करवर वाले, महावीर नगर विस्तार, कोटा द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
महामंत्री श्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन श्री अंकुर जी, उज्जैन; श्री नीरज जी, राहतगढ़; श्री पुनीत जी, फरीदाबाद तथा श्री राजेन्द्र जी, हुकम काका, श्री प्रकाश हरसोरा, श्रीमती सुशीला जी एवं श्री विवेक जी ठोरा परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया। श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि भक्तामर विधान का पुण्यार्जन श्री पुण्योदय भक्तामर मंडल द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
श्री अर्पित एवं श्री सुनील माडिया ने बताया कि मुनिश्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य उपवास के रूप में प्राप्त हुआ। श्री दर्शन बरमुंडा ने बताया कि मुनिश्री प्रणवसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य उषा दीदी, कविता जी, विद्या जैन, चंद्रकला जी, चांदखेड़ी परिवार को प्राप्त हुआ। मंगलाचरण का पुण्य अवसर सिद्धेश्वरी डूंगरवाल द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक सम्पन्न किया गया।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक आचार्य श्री की पूजन-अर्चना, अर्घ्य समर्पण एवं जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया। गुरुवाणी के अमृत संदेश में कहा गया कि हेय को छोड़कर उपादेय को अपनाना, व्रत–नियम से जीवन को अनुशासित बनाना और संयम को आत्मा की स्वतंत्रता समझना ही आत्मकल्याण की दिशा है। मोक्ष केवल सोचने से नहीं, साधना से मिलता है और धर्म सुनने से नहीं, जीवन में उतारने से फलता है। संसार में सब कुछ पाना बड़ी बात नहीं, अपनी आत्मा को पाना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
