कोटा के द्रोणा कैंपस में शुक्रवार को बाल दिवस के अवसर पर मोशन एजुकेशन के फाउंडेशन डिवीजन द्वारा आयोजित बाल मेला बच्चों की प्रतिभा, कल्पनाशीलता और उत्साह का अनोखा संगम बन गया। हजारों बच्चों की उपस्थिति से गुलजार इस आयोजन में मनोरंजन के साथ सीखने का अनूठा मेल दिखाई दिया, जहाँ नन्हें स्टूडेंट्स ने अपनी रचनात्मक क्षमता से हर किसी को प्रभावित किया।

मेले की शुरुआत सुबह से ही उत्साहपूर्ण रही। परिसर में कदम रखते ही बच्चों की चहल-पहल, रंगीन स्टॉलों की सजावट और उनके द्वारा तैयार किए गए आकर्षक मॉडल पूरे वातावरण को जीवंत बना रहे थे। भोजन स्टॉलों पर बच्चों ने भेल-पूरी, सैंडविच और फ्रूट-चाट जैसे व्यंजन खुद बनाकर परोसे, जिन्हें देखने और चखने के लिए अभिभावकों और विद्यार्थियों की भीड़ लगी रही। कई स्टॉलों की सजावट इतनी आकर्षक थी कि लोग फोटो खिंचवाने से खुद को रोक नहीं पाए।

कार्यक्रम में मोशन एजुकेशन के चेयरमैन सुरेंद्र विजय, डायरेक्टर सुशीला विजय, फाउंडर एवं सीईओ नितिन विजय और डायरेक्टर डॉ. स्वाति विजय ने बच्चों से संवाद किया और उनकी मेहनत की सराहना की। बच्चों ने अपने-अपने मॉडल और स्टॉलों के पीछे के आइडिया को आत्मविश्वास के साथ समझाया, जिस पर सभी अतिथियों ने उनकी सोच और प्रतिभा की प्रशंसा की। नितिन विजय ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में टीमवर्क, जिम्मेदारी और रचनात्मक सीखने की प्रवृत्ति को मजबूत करते हैं, जो आगे चलकर उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास में मददगार साबित होती है।

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रहा बच्चों द्वारा तैयार किया गया हॉरर हाउस, जिसे कार्डबोर्ड, ब्लैक पेपर, लाल लाइट्स और साउंड इफेक्ट की मदद से रोमांचक बनाया गया था। अंदर प्रवेश करते ही हल्की अजीब आवाज़ें और अचानक सामने आने वाले पुतले मेहमानों को चौंका देते थे। छोटे बच्चे हिम्मत जुटाते हुए अंदर जाते और डर को हंसी में बदलते हुए बाहर निकलते। कार्यक्रम के समापन तक हॉरर हाउस के बाहर लंबी कतार लगी रही।

फाउंडेशन डिवीजन के एकेडमिक हेड मुकेश गौड़ ने बताया कि इस मेले में मोशन के अलावा कई स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के छात्र शामिल हुए। बच्चों ने स्वयं आइडिया सोचकर मॉडल तैयार किए, स्टॉल सजाए और पूरे कार्यक्रम को जिम्मेदारी के साथ संचालित किया। उनके अनुसार, यह मेला बच्चों में नेतृत्व, आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुआ।

कार्यक्रम के अंत में बच्चे न सिर्फ अपने स्टॉलों और गतिविधियों से मिले अनुभव लेकर लौटे, बल्कि यादों और उपलब्धि की भावना से भी भर गए। बाल दिवस पर आयोजित यह मेला नन्हीं प्रतिभाओं के लिए सीख और मस्ती का एक यादगार मंच बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau

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