मोशन एजुकेशन ओरिएंटेशन प्रोग्राम: नितिन विजय ने दिए सफलता के मंत्र
कोटा में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के फाउंडर नितिन विजय ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण और अनुशासित तैयारी के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।

कोटा में आयोजित मोशन एजुकेशन के ओरिएंटेशन प्रोग्राम के दौरान मंच से विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते संस्थान के फाउंडर और एजुकेटर नितिन विजय।
मोशन एजुकेशन के ओरिएंटेशन प्रोग्राम में बुधवार को विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए संस्थान के फाउंडर और एजुकेटर नितिन विजय ने स्पष्ट कहा कि लक्ष्य तय कर उसकी दिशा में ईमानदार प्रयास शुरू करना ही सफलता की पहली शर्त है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी कमियों पर काम करते हुए लगातार मेहनत जारी रखने की सलाह दी और कहा कि ऐसा करने पर सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
दोपहर में आयोजित फाउंडेशन डिवीजन के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में चेयरमैन सुरेंद्र विजय, डायरेक्टर डॉ. स्वाति विजय और सीनियर फैकल्टीज ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा अनुशासित तैयारी के लिए प्रेरित किया। इसके बाद शाम को जेईई-नीट डिवीजन के ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें विद्यार्थियों को मोशन के अकादमिक सिस्टम से परिचित कराया गया। इस दौरान संस्थान के अकादमिक सिस्टम, टेस्ट पैटर्न और तैयारी की रणनीति की विस्तृत जानकारी दी गई।
फाउंडेशन डिवीजन के कार्यक्रम में नितिन विजय ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि वे क्या बनना चाहते हैं और वहां तक पहुंचने का रास्ता क्या है। उन्होंने करियर चयन से पहले रुचि, संसाधनों की उपलब्धता और लक्ष्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके अनुरूप दिनचर्या, आदतें और कौशल विकसित करना भी अनिवार्य है।
उन्होंने सफल लोगों की समानता बताते हुए कहा कि वे अपनी कमियों को पहचानते हैं और उन्हें दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं। यदि विद्यार्थी अपनी कमजोरियों को ईमानदारी से स्वीकार कर उन पर काम करें, तो सफलता दूर नहीं रहती। उन्होंने सकारात्मक वातावरण में रहने और अच्छे मित्रों का चयन करने की सलाह देते हुए कहा कि सीमित लेकिन अच्छे साथियों के साथ पढ़ाई करने से प्रतिस्पर्धा और प्रेरणा बनी रहती है।
जेईई और नीट अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए नितिन विजय ने कहा कि आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कठिन नहीं, बल्कि अलग प्रकार की होती है, जिसके लिए विद्यार्थी को खुद को उस स्तर तक विकसित करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को उतना ही मिलता है, जितना वह डिजर्व करता है, इसलिए तैयारी में किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को 100 प्रतिशत क्लास अटेंड करने, नियमित टाइम-टेबल बनाने और पूरी ऊर्जा के साथ अध्ययन करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी आज मेहनत करते हैं, वे भविष्य में बेहतर जीवन जीते हैं, जबकि समय गंवाने वालों को आगे चलकर संघर्ष करना पड़ता है।
अपने संबोधन में उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे डॉक्टर बीमारी का इलाज तभी कर सकता है जब मरीज सही लक्षण बताए, उसी प्रकार शिक्षक भी तभी प्रभावी मार्गदर्शन दे सकता है जब विद्यार्थी अपनी समस्या स्पष्ट रूप से बताए। उन्होंने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि नंबर नहीं आ रहे, बल्कि यह बताना जरूरी है कि किस विषय, किस चैप्टर या किस टॉपिक में कठिनाई है। सही प्रश्न पूछने पर ही सही समाधान मिलता है। विद्यार्थियों को अपनी कमजोरियों को छिपाने के बजाय पहचानकर शिक्षकों से साझा करने और निरंतर सुधार की प्रक्रिया अपनाने का संदेश देते हुए उन्होंने इसे सफलता का सबसे प्रभावी मार्ग बताया।
कार्यक्रम में ज्वाइंट डायरेक्टर और जेईई डिवीजन के हेड रामरतन द्विवेदी, नीट डिवीजन के हेड अमित वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर निखिल श्रीवास्तव, सीनियर फैकल्टी और कंटेंट हेड जयंत चित्तौड़ा भी उपस्थित रहे। यह ओरिएंटेशन कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए न केवल दिशा निर्धारित करने वाला रहा, बल्कि अनुशासित और लक्ष्य आधारित तैयारी के महत्व को भी रेखांकित करता नजर आया।

Pratahkal Bureau
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