कोटा, 18 अप्रैल। शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर, पाटनपोल में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर 20 अप्रैल से प्रभु की विशेष 'शीतल सेवा' और 'चंदन महोत्सव' का भव्य आयोजन किया जाएगा। पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार, ग्रीष्m ऋतु के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ठाकुर जी के सुखार्थ राग, भोग और श्रृंगार में व्यापक एवं सात्विक बदलाव किए जा रहे हैं, जो आगामी रथ यात्रा तक अनवरत जारी रहेंगे।

प्रथम पीठ युवराज गोस्वामी मिलन बावा ने महोत्सव की जानकारी देते हुए बताया कि अक्षय तृतीया से प्रभु के श्रीअंग पर चंदन और केसर का शीतल लेपन प्रारंभ होगा। पुष्टिमार्ग में प्रभु के सुख का विचार सर्वोपरि माना जाता है, अतः उन्हें ग्रीष्म ताप से सुरक्षित रखने हेतु मंदिर में पारंपरिक और आधुनिक दोनों ही पद्धतियों से शीतल उपचार किए जाएंगे। इस दौरान प्रभु के निज मंदिर और आंगन में फव्वारे चलाए जाएंगे, द्वारों पर खस की पट्टियां लगाई जाएंगी और कूलर एवं कपड़े के प्राचीन पंखों से मंदिर परिसर को पूर्णतः ठंडा रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, मिट्टी के कुंजा (पात्रों) में शीतल जल की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

ऋतु की प्रधानता के अनुरूप प्रभु के श्रृंगार और वस्त्रों में भी विशिष्ट परिवर्तन किए जाएंगे। ठाकुर जी को भारी वस्त्रों के स्थान पर अत्यंत महीन सूती वस्त्र यथा धोती-ऊपरना, पिछोड़ा और आड़बंद धारण कराए जाएंगे। आभूषणों के चयन में भी विशेष सावधानी बरतते हुए भारी रत्नों के बजाय शीतलता प्रदान करने वाले मोती और सीप से निर्मित आभूषणों का ही प्रयोग होगा, ताकि प्रभु को कोमलता और ठंडक की अनुभूति हो सके।

अक्षय तृतीया से प्रभु की भोग सामग्री और राग सेवा में भी ग्रीष्मकालीन व्यंजनों की प्रधानता रहेगी। ठाकुर जी को सत्तू, लस्सी, छाछ, केरी का पना, आम का रस, खरबूजे का पना, नारियल की बर्फी तथा चंदन एवं गुलाब के शरबत का विशेष भोग समर्पित किया जाएगा। सेवा कीर्तन की शैलियों में परिवर्तन करते हुए अब प्रभु के सुख के लिए आशावरी, देवगंधार और बिलावल जैसी 'शीत रागों' में ही कीर्तन गायन किया जाएगा। मिलन बावा ने स्पष्ट किया कि पुष्टिमार्ग में "प्रभु सुख" की भावना सर्वोपरि है, जिसके तहत मध्याह्न और संध्या काल में निज मंदिर में जल का छिड़काव किया जाएगा।

मंदिर प्रबंधन द्वारा अक्षय तृतीया पर दर्शनों का समय भी निर्धारित कर दिया गया है। दर्शनार्थियों के लिए मंगला के दर्शन प्रातः 6:30 से 7:15 बजे तक होंगे। चंदन से अधिवासन एवं अक्षय तृतीया के विशेष दर्शन तथा राजभोग के दर्शन प्रातः 11 बजे होंगे। इसके पश्चात उत्थापन (भोग आरती सहित) के दर्शन अपराह्न 4 बजे और शयन एवं फूल मंडली के दर्शन सायं 5 बजे सेवानुकूल संपन्न होंगे। भक्ति और समर्पण का यह अनूठा संगम कोटा के इस ऐतिहासिक मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

Pratahkal Newsroom

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