कोटा: श्री बड़े मथुराधीश मंदिर में 40 दिवसीय होली महोत्सव का आगाज
युवराज मिलन कुमार गोस्वामी ने ठाकुर जी को गुलाल अर्पित कर गीली होली की शुरुआत की, बसंत पंचमी से शुरू हुआ 40 दिवसीय होरा।

कोटा के प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर में रविवार को श्रीनाथजी के पाटोत्सव पर ठाकुर जी को गुलाल अर्पित करते युवराज मिलन कुमार गोस्वामी और उपस्थित श्रद्धालु।
कोटा, 8 फरवरी। शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर पर रविवार को श्रीनाथजी का पाटोत्सव मनाया गया। इस दौरान 40 दिवसीय होली महोत्सव के तहत् प्रथम पीठ युवराज मिलन कुमार गोस्वामी ने ठाकुर श्री मथुराधीश प्रभु को रंग और गुलाल सेवित किए। पिचकारी से प्रभु और भक्तों को रंग चढ़ाकर गीली होली की शुरुआत की। वहीं महाराज इज्येराज सिंह को बीड़ा भेंट किया गया। उत्सव में धमार रसिया गायन किया गया।
श्रीनाथ जी का पाटोत्सव और भक्तिमय माहौल
पाटोत्सव के अवसर पर मथुराधीश मंदिर में पुष्टिमार्गीय परंपरा के साथ होली महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर भक्तों के साथ पूरा मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। प्रभु के जयकारों से हवेली गूंज उठी। मंगला दर्शन के पश्चात श्रीनाथजी को पुष्टिमार्गीय परंपरा अनुसार अबीर-गुलाल अर्पित किया गया। मंदिर में सजीव कीर्तन, हवेली संगीत और पद गायन के माध्यम से रसिया गायन किया गया। भक्तों ने "होरी खेलत नंदलाल.." के जयघोष के साथ उत्सव में सहभागिता निभाई।
प्रभु का विशेष श्रृंगार एवं परंपरागत पूजन
- पाटोत्सव के अवसर पर प्रभु को विशेष श्रृंगार, पुष्प अलंकरण एवं ऋतु अनुरूप वस्त्र धारण कराए गए।
- सेवायतों द्वारा परंपरागत विधि से होली खेली गई।
- श्रद्धालुओं ने प्रभु के चरणों में अबीर अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
बसंत पंचमी से होली तक 40 दिवसीय महोत्सव (होरा)
पुष्टिमार्ग के मंदिरों में होली का पर्व 40 दिन का होता है, क्योंकि सबजग होरी या ब्रज होरा अर्थात ब्रज मंडल में 40 दिन की होली होती है जिसे होरा कहते हैं।
युवराज मिलन बावा ने बताया कि:
"पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के मंदिरों में बसंत पंचमी के दिन से ठाकुरजी को अबीर गुलाल धराया जाता है। 40 दिवसीय होली महोत्सव के तहत प्रथम 10 दिन अबीर और गुलाल से होली खेली जाती है। इसके बाद चंदन से, फिर हरी गुलाल, पीली गुलाल से होली खेली जाती है। होली उत्सव का क्रम दिनों के अनुपात में बढ़ता जाता है।"
भोग सेवा में परिवर्तन और मंदिर की सज्जा
प्रथम पीठ युवराज मिलन कुमार गोस्वामी ने बताया कि:
"ठाकुर जी को विशेष भोग धराया गया। जिसमें शक्कर पाडा, मोहन थाल, मोती चूर के लड्डू, बासुन्दी, श्रीखंड आरोगाए। बसंत पंचमी से ठाकुर जी को गरम वस्तुओं का भोग आना भी बंद हो गया है।"
उन्होंने बताया कि मंदिर में आम के पत्तों की बंदनवार सजाई गई।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
