मनोज दुबे का राजस्थान सरकार पर हमला, 1200 करोड़ का निवेश अटकने का लगाया आरोप
बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति ने फ्रांस की कंपनी का निवेश रुकने पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को घेरा।

अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि 'पर्ची सरकार' की प्राथमिकताओं में निवेश और रोजगार सृजन कहीं भी शामिल नहीं है। दुबे ने फ्रांस की प्रतिष्ठित कंपनी 'सौंफ्लेट माल्ट इंडिया' के 1200 करोड़ रुपये के निवेश के अटकने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि इस प्रकरण ने राजस्थान की निवेश नीति की वास्तविक और डरावनी तस्वीर जनता के सामने लाकर रख दी है।
मनोज दुबे ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता होने के बावजूद निवेश धरातल पर नहीं उतर पा रहा है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी सिस्टम की मंशा और कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार 'राइजिंग राजस्थान' के नाम पर केवल खोखली वाहवाही लूटने में व्यस्त है, जबकि वास्तव में निवेशकों की सहायता करने की उनकी कोई सोच ही नहीं है। फ्रांस के राजदूत द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखा गया पत्र इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जिन विषयों पर आपसी सहमति बन चुकी थी, उसके बाद भी निवेशक को जमीन के लिए तरसाया जा रहा है। सरकार जानबूझकर ऐसी विषम परिस्थितियां पैदा कर रही है जिससे निवेशक राज्य से दूर हो जाएं। मुख्यमंत्री का यह कहना कि निवेशक फोन नहीं उठाते और दूसरी ओर निवेशकों का यह आरोप कि सरकार जमीन नहीं दे रही, राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल करने वाला विरोधाभास है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने पूछा कि समिट में समझौता होने और मुख्यमंत्री से सकारात्मक चर्चा के बाद भी यदि विदेशी कंपनी जमीन के लिए भटक रही है, तो इसके पीछे कौन सी शक्तियां सक्रिय हैं? आखिर वह कौन है जो फाइलों को दबाकर बैठा है और किसके इशारे पर निवेश को बाधित किया जा रहा है? दुबे ने सीधा आरोप लगाया कि क्या निवेशकों को जानबूझकर कानूनी और प्रशासनिक उलझनों में इसलिए फंसाया जा रहा है ताकि उन्हें 'सेटिंग' और 'सौदेबाजी' के लिए मजबूर किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में ऐसे दर्जनों उद्यमी मौजूद हैं जो इन्वेस्टर्स समिट में एग्रीमेंट के बाद धरातल पर उद्योग स्थापित कर युवाओं को रोजगार देना चाहते हैं, परंतु वे केवल इसलिए भटक रहे हैं क्योंकि उनकी पहुंच सरकार के उच्च पदों पर बैठे लोगों तक नहीं बल्कि उन 'कमीशनखोरों' के माध्यम तक है जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि भाजपा की इस 'पर्ची सरकार' के एजेंडे में युवाओं का भविष्य और रोजगार की सुरक्षा शामिल नहीं है।

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