कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज दुबे ने पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार हो रही भारी बढ़ोतरी की तीव्र आलोचना करते हुए राजस्थान की भाजपा सरकार से पेट्रोल एवं डीजल पर वैट कम कर आमजन को राहत देने की पुरजोर मांग की है। एक बयान जारी करते हुए मनोज दुबे ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने सिर्फ 9 दिनों की अल्पावधि में ही पेट्रोल-डीजल के दामों मे 5 रुपए की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिसने आम जनता की कमर तोड़कर रख दी है।

उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों मे हुई इस भारी बढ़ोतरी से आमजन की जेब पर सीधा और अत्यंत भारी बोझ पड़ रहा है। विशेषकर डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा और सीधा नुकसान हमारे अन्नदाता किसानों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि इससे उनकी कृषि लागत में अत्यधिक वृद्धि हो गई है।

मामले के तकनीकी और राजस्व पहलुओं को रेखांकित करते हुए वरिष्ठ नेता मनोज दुबे ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम महंगे होने पर राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला वैट स्वतः ही बढ़ जाता है, जिससे सरकार के खजाने में अतिरिक्त राजस्व जमा होता है। उन्होंने भाजपा की नीति और कथनी पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा वैट को लेकर लगातार आक्रामक सवाल उठाती थी, लेकिन आज राजस्थान मे खुद की सरकार बनने पर वही भाजपा वैट कम करने के मुद्दे पर पूरी तरह मौन साधे हुए है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अभी भी राजस्थान में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और गोवा जैसे पड़ोसी व अन्य राज्यों से कहीं ज्यादा वैट वसूला जा रहा है। राज्य सरकार को इस समय अपना मुनाफा कमाने की सोच छोड़कर आमजन के हित में संवेदनशील होकर सोचना चाहिए। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर वैट और रोड सेस में तुरंत प्रभावी कमी करे, ताकि प्रदेश की त्रस्त जनता को इस कमरतोड़ महंगाई से कुछ राहत मिल सके।

आर्थिक मोर्चे पर चौतरफा हमला बोलते हुए मनोज दुबे ने आगे कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के द्वारा मात्र 9 दिनों के भीतर तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाना यह साफ तौर पर साबित करता है कि केंद्र सरकार पूरी तरह से आर्थिक मोर्चे पर विफल हो चुकी है। आज पूरे देश में महंगाई लगातार पैर पसार रही है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है, बेरोजगारी अपने चरम स्तर पर पहुंच चुकी है और इन सब परिस्थितियों के बीच आम आदमी की कमर टूट चुकी है। हर गुजरते दिन के साथ जनता पर नए-नए आर्थिक बोझ लादे जा रहे हैं, लेकिन जनविरोधी सरकार के पास इससे निपटने के लिए न तो कोई ठोस नीति दिखाई देती है और न ही भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट विजन है।

लेख के अंत में उन्होंने इस मूल्यवृद्धि के व्यापक सामाजिक और आर्थिक दूरगामी प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई इस बेतहाशा बढ़ोतरी का सीधा और घातक असर देश के हर वर्ग पर पड़ रहा है। इससे जहां एक तरफ किसान की खेती-किसानी बेहद महंगी हो गई है, वहीं दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप खुले बाजार में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं, जिसने मध्यम वर्ग से लेकर गरीब परिवार तक के हर घर का बजट पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।

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