मनोज दुबे ने आम बजट को बताया किसान विरोधी, एमएसपी पर जताई नाराजगी
किसान महासभा अध्यक्ष मनोज दुबे ने बजट में एमएसपी गारंटी, कर्जमाफ़ी और खाद किल्लत के समाधान की कमी पर केंद्र सरकार की आलोचना की।

कोटा में बजट के विरोध में वक्तव्य देते भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे।
कोटा 1 फ़रवरी। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने आम बजट को किसान विरोधी बताते हुए कहा की आम बजट मे किसानों को ना एमएसपी की क़ानीनी गारंटी मिली, ना किसानों की कर्जमाफ़ी हुई, ना किसान सम्मान निधि मे बढ़ोतरी हुई, आम बजट मे केंद्र सरकार ने किसानों की घोर उपेक्षा की है।
बजट से किसानों को मिली घोर निराशा
"ना एमएसपी की कानूनी गारंटी, ना किसानों की कर्जमाफ़ी, ना किसान सम्मान निधि मे बढ़ोतरी, आम बजट मे किसानों की घोर उपेक्षा हुई।"
किसान नेता मनोज दुबे ने कहा की देश भर के किसान एक बार फिर से केन्द्रीय बजट से उम्मीदें लगाये हुए बैठे थे जिन्हें सरकार की अनदेखी से घोर निराशा हुई है। किसानों और खेती से जुड़ी बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं। खेती से कम होती आमदनी, आसमान छूती उत्पादन लागत और मौसम की मार से परेशान किसान राहत व स्थाई समाधान चाहते थे।
आय दोगुनी करने का लक्ष्य और एमएसपी का सवाल
- "वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का सरकारी लक्ष्य अब तक भी पूरा नहीं हो सका है।"
- ऐसे में सरकार को कम से कम एमएसपी की कानूनी गारंटी की घोषणा करनी चाहिए थी।
- किसानों की एमएसपी को कानूनी दर्ज़ा देने और सम्पूर्ण कृषि ऋण माफी की मांग पर पूरी तरह से खामोशी बरती गई है, जों दुर्भाग्यपूर्ण है।
खाद की किल्लत और जमीनी हकीकत
मनोज दुबे ने कहा की खाद की किल्लत से देश भर के किसान परेशान हैं, खाद की कमी के कारण उत्पादन कम हो रहा है। किसानों को डीएपी और यूरिया खाद के लिए लंबी-लंबी लाइन लगानी पड़ रही है।
"लाइनों मे खड़े किसानों को लाठीयां खानी पड़ रही है। लेकिन आम बजट मे खाद की किल्लत से जूझते किसानों को राहत की कोई योजना की घोषणा नहीं की गई है।"
कर्ज का बोझ और सम्मान निधि की अनदेखी
मनोज दुबे ने कहा की किसानों पर कर्ज का भार बढ़ता जा रहा है, कर्ज से परेशान किसान मज़बूरी मे आत्महत्या करने को मजबूर है। लेकिन आम बजट मे किसानों लिए कर्जमाफ़ी की कोई योजना नहीं है।
आम बजट मे किसान सम्मान निधि मे किसानों को मिलने वाले 6 हजार रुपए सालाना को बढ़ाकर 9 हजार रुपए करने की किसानों की मांग की भी पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
जीएसटी और नकली उत्पादों की समस्या
मनोज दुबे ने कहा की आम बजट मे कृषि उपकरणों से जीएसटी हटाने की भी कोई घोषणा नहीं की गई है। नकली खाद, नकली पेस्टिसाइड और नकली बीज किसानों के लिए बड़ी समस्या है। लेकिन किसानों की इस बड़ी समस्या पर भी केंद्र सरकार का आम बजट मे स्थाई समाधान के लिए कोई घोषणा नहीं करना घोर निराशाजनक है।
2026 का बजट एक साफ़ संदेश देता है की गाँव, किसान और खेत-खलिहान केंद्र की भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं मे नहीं हैं।

Pratahkal Bureau
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