खरीफ एमएसपी में बढ़ोतरी को मनोज दुबे ने बताया किसानों के साथ छलावा
भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के अध्यक्ष ने मक्का और मूंग पर मामूली वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले को लागू करने की मांग की है।

खरीफ फसलों के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मक्का पर मात्र ₹10 प्रति क्विंटल और मूंग पर केवल ₹12 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को किसानों के साथ “घोर छलावा” बताते हुए कहा कि यह एमएसपी वृद्धि नहीं, बल्कि किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा कदम है।
मनोज दुबे ने कहा कि देश का किसान लगातार बढ़ती खेती लागत के दबाव में टूट रहा है। डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, बिजली दरें और मजदूरी लगातार महंगी हो रही हैं, लेकिन सरकार किसानों को राहत देने के बजाय नाममात्र की बढ़ोतरी कर रही है। उन्होंने कहा कि धान पर सिर्फ ₹72 प्रति क्विंटल, मक्का पर ₹10 प्रति क्विंटल और मूंग पर ₹12 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों की मेहनत का अपमान है। उनके अनुसार, जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही हो, तब इतनी मामूली बढ़ोतरी “ऊंट के मुंह में जीरा” साबित होती है।
उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर किसानों की आय दोगुनी, चौगुनी, छह गुनी और आठ गुनी करने के दावों को लेकर भी सवाल उठाए। मनोज दुबे ने कहा कि सरकार बड़े मंचों से किसानों की आय बढ़ाने की बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य तक नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता आर्थिक संकट से गुजर रहा है और सरकार आंकड़ों का खेल खेलकर वाहवाही लूटने में लगी है।
मनोज दुबे ने कहा कि यदि खेती को बचाना है तो एमएसपी को वास्तविक लागत और लाभ के आधार पर तय करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों की वास्तविक लागत और खेतों की जमीनी परिस्थितियों को समझना ही नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि महंगे डीजल, बढ़ती बिजली दरों, खाद और बीज की कीमतों, मजदूरी और मौसम की मार से किसान पहले ही परेशान है। ऐसे समय में एमएसपी में इतनी मामूली बढ़ोतरी किसानों के साथ बड़ा धोखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ₹10 और ₹12 की बढ़ोतरी से किसानों की आय बढ़ेगी या केवल भाषणों में ही वृद्धि दिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में जब हर वस्तु महंगी हो चुकी है, तब किसान की फसल का मूल्य बढ़ाने में सरकार के हाथ क्यों कांपते हैं। किसान देश का पेट भरता है, लेकिन आज वही किसान अपनी मेहनत की सही कीमत के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।
मनोज दुबे ने कहा कि किसानों की मांग स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी तय करने की है, लेकिन सरकार उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। इससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने बढ़ती लागत, बढ़ते कर्ज और घटती आमदनी को किसानों की सबसे बड़ी समस्या बताया।
उन्होंने केंद्र सरकार की एमएसपी घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या देश में एक भी ऐसी फसल बताई जा सकती है जिसकी वास्तविक खरीद वर्तमान में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हो रही हो। उनका आरोप है कि किसान अपनी उपज एमएसपी से कम दामों पर मंडियों में बेचने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसान लुट रहा है और केंद्र सरकार झूठे आंकड़े पेश कर किसानों की आमदनी आठ गुना बढ़ने के दावे कर रही है। किसानों के मुद्दों पर सरकार को राजनीति नहीं, बल्कि गंभीरता दिखानी होगी, क्योंकि खेत बचेगा तभी देश बचेगा।

Pratahkal Bureau
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