कोटा, 24 अप्रैल 2026। भारतीय जनता पार्टी पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर झूठ और भ्रमजाल फैलाकर राजनीति करने तथा जनता को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाते हुए शुक्रवार को गुमानपुरा स्थित कांग्रेस कार्यालय में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पीसीसी द्वारा नियुक्त समन्वयक डॉ. अर्चना शर्मा, शहर जिला अध्यक्ष राखी गौतम और देहात अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से बीजेपी की नीतियों और नीयत पर सवाल उठाए।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण की आड़ में झूठा और भ्रामक प्रचार कर महिलाओं के नाम पर राजनीति का खेल खेल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने में अग्रणी और ऐतिहासिक भूमिका निभाती रही है, जो महिला सशक्तिकरण में निर्णायक रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस सरकार ने 1992 में संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के माध्यम से नगरीय निकायों और पंचायतों में 33 प्रतिशत महिलाओं को संवैधानिक आरक्षण दिया था।

डॉ. शर्मा ने आरोप लगाया कि बंगाल चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार नारी शक्ति वंदन बिल लेकर आई, जिसमें अनेक खामियां थीं और इसे जल्दबाजी में पारित कराने का प्रयास किया गया, लेकिन यह लोकसभा में पास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यह बिल ऐसे समय पर लाया गया जब देश में जनगणना चल रही थी और इसे परिसीमन की शर्तों से जोड़ दिया गया, जिससे स्पष्ट था कि जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं होंगी, तब तक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ कुठाराघात बताते हुए कहा कि खामियों के कारण इस बिल को समर्थन नहीं मिला और विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए इसे जनगणना और परिसीमन से अलग कर सीधे लागू करने की मांग की थी।

शहर जिला अध्यक्ष राखी गौतम ने कहा कि मोदी सरकार ने पश्चिमी बंगाल में चुनाव हारने के डर से महिला आरक्षण कानून को आनन-फानन में लाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद इसमें मौजूद खामियों और नीयत में खोट के कारण यह प्रभावी नहीं हो सका। उनका आरोप था कि इस बिल को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर इसे ठंडे बस्ते में डालने की मंशा थी, ताकि महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ न मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और 1992 में नगर निकायों व पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर यह साबित भी किया है, जबकि बीजेपी ने उस समय इसका विरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे को 30 महीनों तक लटकाए रखा और उसकी कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को आरक्षण देने से सरकार क्यों बच रही है।

देहात अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 1992 में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया था और यदि वर्तमान स्थिति को देखते हुए लोकसभा और विधानसभा में भी 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है, तो कांग्रेस इसका पूर्ण समर्थन करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्तों में उलझाकर अटकाने का प्रयास किया गया, तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी।

प्रेस वार्ता में महासचिव डॉ. विजय सोनी ने जानकारी दी कि कार्यक्रम में लाडपुरा के पूर्व प्रधान नईमुद्दीन, गुड्डू, पूर्व महापौर मंजू मेहरा, कैथून नगरपालिका की पूर्व चेयरमैन आयना महक, ब्लॉक अध्यक्ष गीता मेघवाल, पूर्व अध्यक्ष रुक्मिणी मीणा, पूर्व जिला परिषद सदस्य गायत्री मीणा सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।

अंत में कांग्रेस नेताओं ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि इसे किसी भी शर्त से जोड़कर विलंबित करना महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय होगा और देश की राजनीति में उनकी भागीदारी को बाधित करेगा।

Pratahkal Bureau

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