कोटा में माहेश्वरी समाज के उत्पत्ति दिवस 'महेश नवमी' के उपलक्ष्य में इस वर्ष भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्री माहेश्वरी समाज के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव का आगाज़ 14 जून से हो चुका है, जबकि 21 से 23 जून तक शहर में विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। भगवान महेश और माता पार्वती की आराधना के इस पावन पर्व पर समाज अपनी परंपराओं और संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन करेगा।

महोत्सव के मुख्य आयोजनों की कड़ी में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रातः 6:30 बजे माहेश्वरी भवन में विशेष योगाभ्यास सत्र रखा गया है, जिसके बाद प्रातः 9:15 बजे रक्तदान शिविर का आयोजन होगा। खेलों के प्रति उत्साह को देखते हुए 20 जून को पिकलबॉल और 21 जून को केरम व शतरंज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने के उद्देश्य से 21 जून को सायं 7:15 बजे माहेश्वरी पब्लिक स्कूल में 'नवरंग' कार्यक्रम होगा, जिसमें भारतीय संस्कृति के नौ रंगों को नृत्य के माध्यम से दर्शाया जाएगा। इसके अगले दिन 22 जून को महिलाओं के लिए 'नवसृजन' कार्यक्रम होगा, जिसमें मांडना, क्रोशिया और जीरो ऑयल कुकिंग जैसी रचनात्मक प्रतिस्पर्धाएं मुख्य आकर्षण रहेंगी।

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के उपसभापति राजेश कृष्ण बिरला ने बताया कि महोत्सव का मुख्य आकर्षण 23 जून को आयोजित होने वाला महाशिवाभिषेक और भव्य शोभायात्रा है। प्रातः 7:15 बजे झालावाड़ रोड स्थित माहेश्वरी भवन में 51 विद्वान पंडितों के सानिध्य में 221 शिवलिंगों का निर्माण कर विधिवत महाअभिषेक संपन्न कराया जाएगा। सायं 5:15 बजे ग्लोबल पब्लिक स्कूल से एक विशाल शोभायात्रा प्रारंभ होगी, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शिक्षामंत्री मदन दिलावर और विधायक संदीप शर्मा की उपस्थिति इस गरिमामय आयोजन को और विशेष बनाएगी।

शोभायात्रा में भगवान महेश की झांकी सहित कई धार्मिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी, जो पूरे मार्ग में आकर्षण का केंद्र रहेंगी। यात्रा के दौरान 31 भव्य स्वागत द्वार बनाए जाएंगे। इस महोत्सव का समापन माहेश्वरी पब्लिक स्कूल में आयोजित विशाल सभा और 'डिस्पोजल-फ्री' महाप्रसादी के साथ होगा। पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को दोहराते हुए महाप्रसादी में वेटर के बजाय समाजबंधु स्वयं एक-दूसरे को भोजन परोसकर 'परोसगारी' की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करेंगे। यह महोत्सव न केवल समाज को एकजुट करने का माध्यम है, बल्कि अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अटूट आस्था का भी प्रमाण है।

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