परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की परम शिष्या एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) के पावन सान्निध्य में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में आयोजित ध्यान-योग एवं आध्यात्मिक चिकित्सा शिविर श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक जागरण, आत्मचिंतन और स्वास्थ्य संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं।

अपने प्रवचन में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव के आधार पर कर्मों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि अनुकूल धर्म क्षेत्र, काल और भाव में मनुष्य की मानसिक स्थिति सकारात्मक एवं उन्नत रहती है, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियों में कर्मों का प्रभाव भिन्न रूप में सामने आता है। जैसा वातावरण होता है, कर्म भी उसी अनुरूप अपना फल प्रदान करते हैं। इसलिए यदि जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और आत्मकल्याण की इच्छा है तो ऐसे वातावरण का चयन करना चाहिए जो आत्मा को बल प्रदान करे, न कि कर्मबंधन को सशक्त बनाए।

माताजी ने कहा कि मोक्ष साधना केवल अनुकूल द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव में ही संभव है। प्रतिकूल परिस्थितियां आत्मिक विकास में बाधक बनती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्ममय वातावरण में रहने तथा जीवन को संयम, साधना और आत्मचिंतन से जोड़ने का आह्वान किया।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि शिविर में राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त योगाचार्य नवीन भैया जी (जबलपुर) द्वारा प्रतिदिन प्रातः 7:15 से 8:15 बजे तक ध्यान एवं योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त सायंकालीन सत्रों में भी साधकों को योग, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक जीवनशैली के विविध पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अपनी सहज एवं प्रभावशाली शैली से वे प्रतिभागियों को सकारात्मक सोच, मानसिक संतुलन और स्वस्थ जीवन के सूत्र प्रदान कर रहे हैं।

शिविर में सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, मनोज जैसवाल, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, टीकम पाटनी, पंकज खटोड़, पारस आदित्य, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, अशोक सांवाला, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी, संजय लुहाड़िया एवं विनोद टोरडी सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

ध्यान, योग और आध्यात्मिक चिकित्सा के माध्यम से आत्मबल, मानसिक संतुलन और मोक्ष साधना के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाला यह शिविर धार्मिक चेतना और आध्यात्मिक जागरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।

Pratahkal Bureau

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