कोटा के कायाकल्प का संकल्प: साल 2026 तक स्लम और नशा मुक्त बनेगा शिक्षा का यह केंद्र
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने साल 2026 तक कोटा को स्लम-मुक्त और नशा-मुक्त बनाने का महासंकल्प लिया है। इस योजना के तहत गरीबों को किराए पर मकान, चंबल गार्डन और भीतरिया कुंड का 70 करोड़ से कायाकल्प, और 2027 तक एयरपोर्ट की शुरुआत जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। जानिए कैसे कोचिंग सिटी कोटा अब इंडस्ट्रियल और एग्रो हब बनने की ओर अग्रसर है।

कोटा। राजस्थान की शैक्षणिक नगरी कोटा अब अपनी पहचान को नए आयाम देने की दहलीज पर खड़ी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शहर के भविष्य को लेकर एक दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है, जिसके तहत साल 2026 तक कोटा को न केवल स्लम-मुक्त और नशा-मुक्त बनाया जाएगा, बल्कि इसे देश के अग्रणी लोकसभा क्षेत्रों की श्रेणी में भी स्थापित किया जाएगा। मंगलवार को कोटा के एक स्थानीय होटल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने स्पष्ट किया कि कोटा की छवि अब केवल 'कोचिंग कैपिटल' तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह अपराध मुक्त, प्रदूषण मुक्त और बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित एक आधुनिक महानगर के रूप में उभरेगा।
इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखते हुए श्री बिरला ने घोषणा की कि 2026 से कोटा को स्लम-मुक्त बनाने का सघन अभियान शुरू होगा। इस योजना का सबसे मानवीय पहलू यह है कि फुटपाथ और सड़कों पर जीवन बसर करने वाले निर्धन परिवारों को सरकार की ओर से किराए पर मकान उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और शहर में स्वच्छता का स्तर भी ऊंचा हो सके। नशे और अपराध के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को सट्टा, जुआ और नशे के कारोबार को जड़ से मिटाने के निर्देश दिए गए हैं। उनका लक्ष्य कोटा को एक सुरक्षित और 'एक्सीडेंट फ्री' सिटी बनाने का है, जहां छात्र और नागरिक बिना किसी भय के रह सकें।
विकास की इस गाथा में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का विशेष महत्व है। श्री बिरला ने जानकारी दी कि कोटा एयरपोर्ट साल 2027 तक पूरी तरह क्रियाशील हो जाएगा, जो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल लाइन के साथ मिलकर विकास के नए द्वार खोलेगा। औद्योगिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कोटा अब 'डार्क जोन' से बाहर है और यहां पानी की प्रचुरता है। चंबल, पार्वती, कालीसिंध और परवन नदियों के अतिरिक्त जल का उपयोग करने के लिए नोनेरा बांध जैसे प्रोजेक्ट्स उद्योगों के लिए वरदान साबित होंगे। आगामी 2026 में आयोजित होने वाला 'एग्रोटेक मेला' और प्रस्तावित फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, डेयरी उद्योग एवं वेजिटेबल प्रोसेसिंग प्लांट इस क्षेत्र को एक बड़े इंडिस्ट्रीयल और एग्रो हब में तब्दील कर देंगे।
पर्यटन और जन-सुविधाओं के क्षेत्र में भी कोटा एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। चंबल गार्डन और भीतरिया कुंड के नवीनीकरण के लिए 70 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, जिसका टेंडर जनवरी में जारी होगा। वहीं, किशोर सागर तालाब के सौंदर्यकरण के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से कैंटीलेवर ब्रिज और अन्य आकर्षक स्थल बनाए जा रहे हैं। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए श्री बिरला ने बताया कि देश में पहली बार हवाई मार्ग से बाघिन का ट्रांसलोकेशन हुआ है, जिसे पेंच टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी लाया गया है। इसके साथ ही, जून 2026 तक हैंगिंग ब्रिज से कोटा बैराज तक के क्षेत्र को घड़ियाल सेंचुरी से मुक्त कराने के प्रयास जारी हैं ताकि चंबल में पर्यटन सफारी को गति मिल सके।
शहर के सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए दिव्यांग पार्क, संविधान पार्क और वैदिक पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए निजी सहयोग से राजस्थान का पहला कैंसर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल तैयार किया जा रहा है, जहां गरीब मरीजों को किफायती दरों पर इलाज मिल सकेगा। दशहरा मैदान के श्रीराम रंगमंच को कवर्ड करने से लेकर नयापुरा बस स्टैंड के पुनर्निर्माण तक, ओम बिरला की यह योजनाएं कोटा को 2026 तक एक ऐसी वैश्विक नगरी के रूप में स्थापित करने का संकल्प हैं, जहां प्रगति और परंपरा का अनूठा संगम होगा।

Pratahkal Bureau
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