कोटा। मानवता की सेवा और अंधकारमय जीवन में प्रकाश भरने के संकल्प ने कोटा को एक बार फिर प्रदेश पटल पर गौरवान्वित किया है। स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन अवसर पर, भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित भव्य 'सेवा संगम सम्मान' समारोह में आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, कोटा चैप्टर की निस्वार्थ सेवाओं को सर्वोच्च सराहना प्राप्त हुई। राजस्थान के माननीय राज्यपाल हरिभाऊ किसन राव बागड़े ने संस्था के समर्पण को पहचानते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र से अलंकृत किया। यह सम्मान न केवल एक संस्था की उपलब्धि है, बल्कि कोटा के उन सैकड़ों दानवीर परिवारों के प्रति एक कृतज्ञता भी है जिन्होंने दुख की घड़ी में भी दूसरों के जीवन को रोशन करने का साहस दिखाया।

वर्ष 2011 में अपनी यात्रा शुरू करने वाली आई बैंक सोसायटी, कोटा चैप्टर आज नेत्रदान के क्षेत्र में राजस्थान की एक अग्रणी शक्ति बन चुकी है। अपनी स्थापना से लेकर अब तक संस्था ने 2100 से अधिक नेत्रदान संकलित करने का अविश्वसनीय कीर्तिमान स्थापित किया है। आंकड़ों की गहराई में उतरें तो वर्ष 2025 संस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, जिसमें अकेले कोटा शहर से 113 जोड़ी नेत्रदान प्राप्त किए गए। सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से प्रशंसनीय पहलू इन कॉर्निया की उपयोगिता दर रही, जो लगभग 70 प्रतिशत दर्ज की गई। चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से यह दर प्रदेश स्तर पर एक उत्कृष्ट उपलब्धि मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि संस्था न केवल संकलन बल्कि रखरखाव और गुणवत्ता में भी मानक स्थापित कर रही है।

समारोह के दौरान संस्था के अध्यक्ष डॉ. के.के. कंजोलिया ने भविष्य की ऊर्जा को साझा करते हुए बताया कि सफलता का यह सिलसिला थमा नहीं है। पिछले मात्र तीन महीनों के भीतर ही संस्था ने 32 और नेत्रदान प्राप्त किए हैं, जो समाज में बढ़ती जागरूकता का जीवंत प्रमाण है। राज्यपाल के हाथों इस गौरवशाली सम्मान को ग्रहण करने के लिए मंच पर डॉ. के.के. कंजोलिया (प्रेसिडेंट), सुरेश सेठवाल (सचिव) एवं टिंकू ओझा उपस्थित रहे। राज्यपाल महोदय ने संस्था के प्रतिनिधियों की पीठ थपथपाते हुए उनके द्वारा किए जा रहे मानवीय कार्यों की सराहना की।

यह आयोजन इस बात का गवाह बना कि कैसे सामूहिक प्रयास और अटूट सेवा भाव एक शहर को 'नेत्रदान की राजधानी' के रूप में विकसित कर सकता है। आई बैंक सोसायटी की यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह उस सामाजिक चेतना का भी प्रतीक है जो मृत्यु के बाद भी परोपकार की मशाल को जलाए रखती है। कोटा चैप्टर की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब इरादे नेक हों और नेतृत्व समर्पित हो, तो हजारों आंखों को दुनिया देखने का दोबारा अवसर दिया जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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