कोटा में विश्व जल दिवस पर गोष्ठी, विशेषज्ञों ने जल संरक्षण को बताया भविष्य का आधार
आईबीसी कोटा चेप्टर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ईआरसीपी प्रोजेक्ट के विशेषज्ञों ने गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताई और वर्षा जल संचयन की शपथ दिलाई।

कोटा के नयापुरा स्थित पीडब्ल्यूडी विभाग में आयोजित गोष्ठी के दौरान मंचासीन मुख्य अतिथि ए.डी. अन्सारी, धीरेन्द्र माथुर, हेमन्त कुमार शर्मा एवं अन्य गणमान्य अतिथि।
कोटा, 25 मार्च। जल ही जीवन का आधार है और इसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसी संदेश के साथ आईबीसी कोटा लोकल चेप्टर द्वारा विश्व जल दिवस पर पीडब्ल्यूडी विभाग, नयापुरा में एक प्रभावी गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न विभागों के अभियंताओं और प्रबुद्धजनों ने भाग लेकर जल संरक्षण और प्रबंधन के मुद्दे पर गंभीर चिंतन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ और गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जल संसाधन विभाग (ईआरसीपी प्रोजेक्ट) के अति. मुख्य अभियंता ए.डी. अन्सारी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य अभियंता धीरेन्द्र माथुर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पीडब्ल्यूडी के पूर्व अधिशाषी अभियंता आर. के. गौड़, पीएचईडी के पूर्व अधिशासी अभियन्ता प्रकाशवीर नाथानी, आईबीसी कोटा चेप्टर के चैयरमेन हेमन्त कुमार शर्मा, सचिव इंजीनियर मनीष जैन और कोषाध्यक्ष अशोक सनाढ्य उपस्थित रहे। साथ ही आईबीसी कोटा चेप्टर के पूर्व चैयरमेन सुरेश कुमार बैरवा, बीएल मालव, बीएल नरसल, डीआर क्षत्रिय, डॉ. शांतिलाल जैन और आर. के. लोहमी आदि प्रबुद्धजन भी उपस्थित रहे।
जल संरक्षण: वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
आईबीसी कोटा चेप्टर के चेयरमैन हेमन्त कुमार शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि "वर्तमान समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है और हर व्यक्ति को इस दिशा में जिम्मेदारी निभानी होगी।" पीएचईडी के पूर्व अधिशासी अभियंता प्रकाशवीर नाथानी ने वर्ष 2026 के विश्व जल दिवस की थीम 'वॉटर एंड जेंडर' पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि "भूजल का अत्यधिक दोहन, सड़कों के किनारे कंक्रीटीकरण, वर्षा जल का व्यर्थ बहना और पारंपरिक जल स्रोतों की उपेक्षा जल संकट को बढ़ा रही है।" उन्होंने वर्षा जल संचयन, महिलाओं की भागीदारी और पुरातन जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
नागरिक कर्तव्य और पारंपरिक जल संरचनाएं
आईबीसी के कोटा चेप्टर के पूर्व अध्यक्ष एवं सा.नि.वि. के पूर्व अति. मुख्य अभियंता सुरेश कुमार बैरवा ने जल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि "जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है, इसलिए इसका संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य है।" इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य अभियंता धीरेन्द्र माथुर ने पंचतत्वों में जल के महत्व को रेखांकित किया, वहीं पूर्व अधिशासी अभियंता आर. के. गौड़ ने पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
ईआरसीपी योजना और भविष्य की सुरक्षा
मुख्य अतिथि ए.डी. अंसारी ने राज्य सरकार द्वारा संचालित ईआरसीपी योजना के तहत बनाए जा रहे बांधों और परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि "इनसे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे न केवल पेयजल संकट कम होगा बल्कि कृषि के लिए भी जल उपलब्धता बढ़ेगी।" कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी जनों को जल संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन सचिव इंजीनियर मनीष जैन द्वारा किया गया।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
