कोटा। शिक्षा नगरी कोटा में मकर संक्रांति का पर्व केवल पतंगबाजी और दान-पुण्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जेसीआई कोटा एलिगेंस ने इसे सेवा और आत्मीयता का नया अध्याय बना दिया। संस्था द्वारा अपनाई गई बंगाली बस्ती में आयोजित 'खुशियों की पोटली' कार्यक्रम ने अभावों में जी रहे बच्चों के जीवन में उत्सव का रंग भर दिया। कड़ाके की ठंड और त्योहार के इस पावन अवसर पर जब इन बच्चों के हाथों में खुशियों का उपहार पहुंचा, तो उनके चेहरों की मुस्कान ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया। यह आयोजन केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों को मुख्यधारा के उत्सव से जोड़ने की एक संवेदनशील पहल थी।

संस्था की अध्यक्ष अनुषा जैन के नेतृत्व में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों को मकर संक्रांति के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को समझाने के साथ हुई। उत्सव को जीवंत बनाने के लिए सचिव रिंकू जैन और कोषाध्यक्ष पूजा सोलंकी के कुशल निर्देशन में मनोरंजक एवं रचनात्मक गतिविधियों का तांता लगा रहा। बच्चों के बीच गुब्बारा संतुलन दौड़ जैसी खेल स्पर्धाओं ने जहाँ उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना जाग्रत की, वहीं पतंग महोत्सव थीम पर आधारित ड्राइंग प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने अपनी कल्पनाओं के रंग उकेरे। इन कलाकृतियों का सूक्ष्म अवलोकन कर सर्वश्रेष्ठ तीन प्रतिभागियों का चयन संस्था की संस्थापक मेघना शेखावत द्वारा किया गया, जिन्होंने बच्चों के हुनर की मुक्त कंठ से सराहना की।

पर्व की सार्थकता को चरितार्थ करते हुए पूर्व अध्यक्ष गुनजीत जोहर, मार्गदर्शक यशिका विजय, ज्योति सारा, सुप्रिया मंडलोई और समता जैन के सहयोग से बच्चों को पौष्टिक भोजन, पारंपरिक मिठाइयां और गुड़-तिल्ली का वितरण किया गया। त्योहार के उत्साह को दोगुना करने के लिए प्रत्येक बच्चे को पतंग और रंग भी भेंट किए गए। इस भावुक क्षण पर संस्था के पदाधिकारियों ने साझा संदेश दिया कि त्योहारों की वास्तविक सार्थकता और आनंद तभी पूर्ण होता है जब हमारी एक छोटी सी कोशिश किसी जरूरतमंद के जीवन में उजियारा ला सके।

इस पुनीत कार्य को सफलता के शिखर तक पहुँचाने में मंदीप साहिनी, मोनिका विजय, नमिता श्रीवास्तव, जसदीप खेरा, दीक्षा जैन और हर्षिता सूखेजा सहित संस्था के समस्त सदस्यों ने अपना सक्रिय योगदान दिया। सामूहिक प्रयास और सेवा के इस महाकुंभ ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता के माध्यम से समाज में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। जेसीआई कोटा एलिगेंस की इस पहल ने न केवल बंगाली बस्ती के 50 से अधिक बच्चों का दिन यादगार बनाया, बल्कि शहर के समक्ष सामाजिक समरसता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

Pratahkal Newsroom

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