कोटा। भारत की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, आस्था और ऐतिहासिक निरंतरता का जीवंत दर्शन 31 दिसंबर 2025 को कोटा में देखने को मिलेगा, जब दिव्य श्री सोमनाथ शिवलिंग यात्रा नगर में प्रवेश करेगी। यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस अविच्छिन्न धारा का प्रमाण है, जिसने समय, आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद अपनी मूल चेतना को अक्षुण्ण बनाए रखा है। कोटा के लिए यह अवसर ऐतिहासिक और दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि लगभग एक हजार वर्षों बाद श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल शिवलिंग अंशों का सार्वजनिक दर्शन जनसामान्य के लिए संभव हो रहा है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखता है। इतिहास साक्षी है कि अनेक आक्रमणों और बार-बार हुए विध्वंस के बावजूद इसके मूल अंश सुरक्षित रहे और पीढ़ी दर पीढ़ी गुप्त रूप से पूजित होते रहे। अब इन मूल शिवलिंग अंशों को पूरे देश में दर्शनार्थ ले जाया जा रहा है, ताकि आमजन सनातन धर्म की अदम्य शक्ति, उसकी ऐतिहासिक निरंतरता और सांस्कृतिक चेतना को प्रत्यक्ष अनुभव कर सके। इस यात्रा का मूल उद्देश्य यही संदेश देना है कि सनातन परंपरा को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही मिटाया जा सकता है।

आयोजकों के अनुसार, दिव्य श्री सोमनाथ शिवलिंग यात्रा 31 दिसंबर को सायंकाल 4 बजे श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, टिपटा रेतवाली, कोटा से प्रारंभ होगी। यात्रा दशहरा मैदान और शक्ति नगर मार्ग से होते हुए गोदावरी बालाजी मंदिर पहुँचेगी, जहाँ दिव्य श्री सोमनाथ शिवलिंग को आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विधिवत स्थापित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के हर वर्ग और हर आयु के श्रद्धालु इस ऐतिहासिक दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकें।

इस भव्य आयोजन को आकार देने में आर्ट ऑफ लिविंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यात्रा के समन्वय और आयोजन में राजीव गुप्ता, जिला शिक्षक समन्वयक, योगेन्द्र हर्सोरा, राजस्थान एपेक्स मेंबर, तथा प्रमोद गौतम, ज़ोनल टीचर कोऑर्डिनेटर, प्रमुख रूप से जुड़े हुए हैं। इनके प्रयासों से यह यात्रा केवल एक धार्मिक शोभायात्रा तक सीमित न रहकर आध्यात्मिक जागरण अभियान के रूप में सामने आ रही है, जिसका उद्देश्य समाज में शांति, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है।

आयोजकों ने कोटा सहित पूरे हाड़ौती अंचल के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सपरिवार इस दिव्य और ऐतिहासिक यात्रा में सहभागी बनें। उनका कहना है कि यह अवसर न केवल दर्शन का पुण्य प्रदान करेगा, बल्कि सनातन इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय का साक्षी बनने का भी अवसर देगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

Pratahkal Bureau

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