मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में घायल पशुओं को कुत्तों द्वारा नोचे जाने का मामला, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
कोटा के राजकीय पशु चिकित्सालय में घायल पशुओं को आवारा कुत्तों द्वारा नोचे जाने के मामले ने हड़कंप मचा दिया। समाजसेवी हिम्मत सिंह ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कोटा के कैथूनीपोल थाने में समाजसेवी हिम्मत सिंह (बाएं) अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कराने के लिए थानाधिकारी अमरेश सिंह (दाएं) को परिवाद सौंपते हुए।
कोटा के राजकीय पशु चिकित्सालय, मोखापाड़ा में भर्ती घायल एवं मृत पशुओं को आवारा कुत्तों द्वारा नोचे जाने के गंभीर मामले ने पशु संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर समाजसेवी हिम्मत सिंह ने कैथूनीपोल थाने में अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 जून की सुबह गौसेवकों ने अस्पताल परिसर में एक चिंताजनक दृश्य देखा, जहां आवारा कुत्ते घायल पशुओं का मांस नोचते नजर आए। घटना की जानकारी अस्पताल कर्मचारियों को दी गई तो उन्होंने कथित रूप से इसे रोजमर्रा की घटना बताते हुए कर्मचारी अभाव का हवाला दिया। इस जवाब से नाराज गौसेवकों और समाजसेवियों में रोष व्याप्त हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए समाजसेवी हिम्मत सिंह स्वयं अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने कैथूनीपोल थानाधिकारी अमरेश सिंह को परिवाद प्रस्तुत कर अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
हिम्मत सिंह ने कहा कि पशु चिकित्सालयों एवं गौशालाओं में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए तथा घायल एवं बीमार पशुओं की देखभाल के लिए 24 घंटे चिकित्सकीय सेवाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो साधु-संतों, गौसेवकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
मुकदमा दर्ज कराने के दौरान अमर धामोंनिया, नरेंद्र गुर्जर, पीयूष खंडेलवाल, संजीव शर्मा, शुभम गुप्ता, गोलू जैन, करन शर्मा और अमित कुमार सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य भी उपस्थित रहे।
यह मामला न केवल पशु कल्याण व्यवस्था की निगरानी और प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है, बल्कि घायल एवं असहाय पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्थाओं की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। अब इस मामले में प्रशासन और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau
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