पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत शिक्षा के क्षेत्र में कोटा विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी एक विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। उज्बेकिस्तान के समरकंद स्थित प्रतिष्ठित 'सिल्क रोड इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ टूरिज्म एंड कल्चरल हेरिटेज' ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूरे भारत से कोटा विश्वविद्यालय को अपना एकमात्र आधिकारिक साझेदार संस्थान चयनित किया है। यह गौरवपूर्ण अवसर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) बी.पी. सारस्वत के दूरदर्शी मार्गदर्शन और पर्यटन एवं आतिथ्य विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

इस साझेदारी के तहत सिल्क रोड इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने भारतीय विद्यार्थियों के लिए पांच पूर्णतः ग्रांट-आधारित छात्रवृत्तियां घोषित की हैं। इस संबंध में विश्वविद्यालय के प्रथम उपकुलपति (प्रशासन) डी. नसीमोव ने प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा को आधिकारिक पत्र प्रेषित कर भारतीय विद्यार्थियों के बीच इस अवसर को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने और चयन प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग का अनुरोध किया है। इच्छुक अभ्यर्थी 1 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं, जिसके पश्चात आगामी सितंबर माह से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होगा।

कुलगुरु प्रो. (डॉ.) बी.पी. सारस्वत ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख और शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कोटा विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग से छात्रों को न केवल विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध के अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। उन्होंने अधिक से अधिक छात्रों से इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया है।

पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा ने छात्रवृत्ति के विस्तृत विवरण साझा करते हुए बताया कि चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह 500 अमेरिकी डॉलर की छात्रवृत्ति और 100 अमेरिकी डॉलर छात्रावास व्यय के लिए प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, भारत-उज्बेकिस्तान के मध्य यात्रा हेतु इकोनॉमी क्लास का निःशुल्क हवाई टिकट भी शामिल है। छात्रों को उज्बेकिस्तान की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू कराने के लिए वर्ष में दो विशेष अध्ययन यात्राएं आयोजित की जाएंगी, जिसके लिए प्रत्येक यात्रा पर 100 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा।

यह छात्रवृत्ति उज्बेकिस्तान सरकार की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग नीति के अंतर्गत दी जा रही है। इसके माध्यम से विद्यार्थी पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन, पुरातत्व, कला एवं स्थापत्य स्मारकों की बहाली, संग्रहालय विज्ञान, संरक्षण तथा ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव जैसे विशिष्ट विषयों में मास्टर डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। यह अनूठा शैक्षणिक गठबंधन भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भविष्य के विशेषज्ञों को तैयार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगा।

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