राजस्थान के युवाओं को वैश्विक मंच पर सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए कोटा विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर नीलू चौहान के अनुसार, इस अवसर पर विदेशी भाषा कौशल कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्थान सरकार और इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी (EFLU), हैदराबाद के मध्य हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर विस्तृत चर्चा की गई। इस गरिमामयी कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 22 विभागों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने अत्यंत उत्साह के साथ अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य में कौशल आधारित शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और यह विदेशी भाषा कौशल कार्यक्रम इसी संकल्प की एक ठोस अभिव्यक्ति है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस एमओयू के अंतर्गत विद्यार्थियों को न केवल उच्च गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त होगा, बल्कि उन्हें मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र एवं उत्कृष्ट प्लेसमेंट सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राजस्थान सरकार प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर दक्ष बनाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। उन्होंने जानकारी दी कि EFLU हैदराबाद के साथ हुए इस समझौते के तहत विद्यार्थियों को जापानी, जर्मन, फ्रेंच, कोरियाई, स्पेनिश एवं अंग्रेजी सहित कुल छह विदेशी भाषाओं का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल से युवाओं के संवाद कौशल में निखार आने के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों में करियर के द्वार खुलेंगे। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर गांव-गांव तक पहुंचेगी, ताकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के होनहार छात्र भी इसका पूर्ण लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान युग में भाषा कौशल महज एक अतिरिक्त योग्यता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।

कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत ने इस एमओयू को विद्यार्थियों के लिए 'अवसरों का द्वार' संज्ञा देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पारंपरिक शिक्षा के साथ बहुभाषीय दक्षता और वैश्विक दृष्टिकोण होना अत्यावश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे करियर में असीमित संभावनाएं उत्पन्न होंगी। कुलगुरु ने समस्त संकाय सदस्यों से विद्यार्थियों को इस योजना से जोड़ने की अपील करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में पूर्व से संचालित कौशल विकास केंद्र इस कार्यक्रम की नींव को और सुदृढ़ करेगा। कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने इस कार्यक्रम को राज्य सरकार की दूरदर्शिता का परिणाम बताया, जो युवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार के योग्य बनाएगा। कार्यक्रम में राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई की भी उपस्थिति रही।

संवाद सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष विदेशी भाषा प्रशिक्षण और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न रखे, जिनका मुख्यमंत्री ने पूर्ण पारदर्शिता और गुणवत्ता के आश्वासन के साथ संतोषजनक उत्तर दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर नीलू चौहान, स्नातकोत्तर अधिष्ठाता प्रोफेसर घनश्याम शर्मा, फार्मेसी विभाग से डॉ. के. के. शर्मा व डॉ. सरिता सोलंकी तथा विधि विभाग समन्वयक डॉ. प्रियंका सैनी सहित विभिन्न विभागों के गणमान्य जन उपस्थित रहे, जो राजस्थान के शैक्षिक इतिहास के इस नए अध्याय के साक्षी बने।

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