कृषि पर्यटन और आतिथ्य शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में कोटा विश्वविद्यालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एग्री टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एटीडीसी), पुणे के साथ पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया। इस समझौते के तहत कृषि पर्यटन (एग्री टूरिज्म) शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण, कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में दोनों संस्थान संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।

कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) बी.पी. सारस्वत के मार्गदर्शन में 16 जुलाई को यह एमओयू संपन्न हुआ। पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा ने बताया कि समझौते के तहत कृषि एवं ग्रामीण पर्यटन, उद्यमिता विकास, प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण, इंटर्नशिप, शोध तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के संचालन में दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे। एमओयू की अवधि प्रारंभिक रूप से पांच वर्ष निर्धारित की गई है।

कार्यक्रम में भारत में 'फादर ऑफ एग्री टूरिज्म कॉन्सेप्ट' के रूप में विख्यात तथा एटीडीसी के प्रबंध निदेशक पांडुरंग तावरे विशेष रूप से उपस्थित रहे। कृषि पर्यटन के क्षेत्र में उनके नवाचारों को भारत सरकार के राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

इस अवसर पर राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) के कुलपति प्रो. निमित चौधरी, कोटा विश्वविद्यालय के कुलसचिव मुरलीधर परिहार, इंटैक कोटा चैप्टर के ई-कन्वीनर एवं हाड़ौती पर्यटन विकास समिति के उपाध्यक्ष निखिलेश सेठी, करेजियस कम्युनिटी के निदेशक विनोद कुमार जेटली, केशोरायपाटन के किसान श्याम सुंदर शर्मा, रावलखेड़ा के कमल सिंह हाड़ा तथा ईकी के यशवंत नामा सहित कई कृषक, पर्यटन एवं कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय बढ़ाने के विजन को साकार करने की दिशा में यह समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि पर्यटन के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश, कृषि संस्कृति, जैविक खेती, आयुर्वेदिक औषधीय पौधों और पारंपरिक उत्पादों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए स्रोत विकसित होंगे तथा हाड़ौती क्षेत्र में कृषि पर्यटन की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा।

कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाना है। उन्होंने कहा, "यह एमओयू विद्यार्थियों को कक्षा से सीधे उद्योग और खेत तक जोड़ने का कार्य करेगा। कृषि पर्यटन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन और उद्यमिता का उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं।"

एग्री टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, पुणे के प्रबंध निदेशक एवं भारत में कृषि पर्यटन अवधारणा के जनक पांडुरंग तावरे ने बताया कि महाराष्ट्र में तीन हजार से अधिक किसान कृषि पर्यटन से जुड़े हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की कृषि विविधता, रेगिस्तानी क्षेत्र, वन संपदा, जैविक खेती और समृद्ध ग्रामीण संस्कृति इसे कृषि पर्यटन के लिए उपयुक्त बनाती है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब गांव आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।

पांडुरंग तावरे ने बताया कि इस पाठ्यक्रम से अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को 118 देशों में कृषि पर्यटन से जुड़े अवसरों और वैश्विक एक्सपोजर का लाभ मिलेगा। एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को इंडस्ट्री एक्सपोजर और लाइव प्रोजेक्ट पर कार्य करने का अनुभव, इंटर्नशिप एवं ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, देशभर में स्टडी टूर और अध्ययन भ्रमण, कौशल विकास प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट के अवसर तथा कृषि पर्यटन आधारित स्टार्टअप और स्वरोजगार के लिए तैयारी के अवसर मिलेंगे।

विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा ने बताया कि एमओयू के तहत कोटा विश्वविद्यालय का पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग कृषि पर्यटन व्यवसाय प्रबंधन से संबंधित डिग्री, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम विकसित एवं संचालित करेगा। इन पाठ्यक्रमों का सिलेबस उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

वहीं एटीडीसी पुणे इन पाठ्यक्रमों के प्रचार-प्रसार, अध्ययन भ्रमण, प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास, फार्म टूर संचालन, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण, इंटर्नशिप तथा प्लेसमेंट गतिविधियों का संचालन करेगा। इससे विद्यार्थियों को देशभर के सफल कृषि पर्यटन मॉडलों को समझने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) के कुलपति प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि हमारी प्राकृतिक पहचान है। कृषि पर्यटन पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन का स्वरूप है, जिसका प्रकृति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। यह स्थानीय किसानों और कृषि फार्मों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम है तथा ग्रामीण जीवनशैली को नई पहचान देता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से आने वाले समय में कृषि पर्यटन को व्यापक विस्तार मिलेगा।

यह समझौता कोटा विश्वविद्यालय में कृषि पर्यटन शिक्षा को नई दिशा देने के साथ विद्यार्थियों को कक्षा से खेत और उद्योग तक जोड़ने का माध्यम बनेगा, जिससे हाड़ौती क्षेत्र की ग्रामीण संस्कृति और कृषि आधारित संभावनाओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का मार्ग तैयार होगा।

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