कोटा: राम राज्याभिषेक के साथ श्रीरामकथा का भव्य समापन, भक्ति के उल्लास में सराबोर हुआ राधारानी पार्क
कोटा के राधारानी पार्क में श्रीरामकथा का भव्य समापन हुआ। पंडित तुलसीराम शर्मा द्वारा राम राज्याभिषेक के सजीव वर्णन और 'राम आएंगे' जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। झांकियों और महाआरती के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

कोटा। अध्यात्म और श्रद्धा की पावन त्रिवेणी जब भक्ति के सागर से मिलती है, तो दृश्य अलौकिक हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा कोटा के रंगबाड़ी योजना सेक्टर–4 स्थित राधारानी पार्क में देखने को मिला, जहाँ श्रीरामकथा के अंतिम दिन प्रभु श्रीराम के आगमन और राज्याभिषेक के प्रसंग ने संपूर्ण वातावरण को दिव्यता से भर दिया। 'मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे' के स्वर जब पंडाल में गूंजे, तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखों से भक्ति के अश्रु छलक पड़े और पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
श्रीरामकथा के इस अंतिम एवं निर्णायक दिवस पर श्रीकामखेड़ा बालाजी महाराज के पुजारी पंडित तुलसीराम शर्मा ने अपनी ओजस्वी वाणी से माता सीता की अग्नि परीक्षा, प्रभु राम का वनवास पश्चात अयोध्या आगमन और राम राज्याभिषेक के प्रसंग का सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राम का राज्याभिषेक केवल एक राजा का सिंहासन पर बैठना नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का शाश्वत उत्सव है। कथा के उपरांत पूर्ण विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति हवन संपन्न हुआ, जिसके पश्चात आयोजित महाआरती में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भक्ति का यह प्रवाह तब और अधिक प्रखर हो गया जब भजनों की स्वर लहरियों ने श्रोताओं को आत्मविभोर कर दिया। “छम-छम नाचे वीर हनुमाना” और प्रभु आगमन के भजनों पर श्रद्धालु स्वयं को थिरकने से रोक नहीं पाए। ढोलक और मंजीरों की थाप ने पूरे पंडाल में एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। इस आयोजन की भव्यता में सजीव झांकियों ने चार चांद लगा दिए, जिसमें अजय सक्सेना की कुशल भूमिका रही। रंगमंच पर गुरु वशिष्ठ के रूप में अराध्य शर्मा, राम के रूप में दिव्या, सीता के रूप में दिव्यांशी, लक्ष्मण के रूप में मोनिका और कीर्ति ने अपने जीवंत अभिनय से त्रेतायुग के दृश्यों को साक्षात जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन करते हुए कृष्णार्थी राकेश विजयवर्गीय ने कथा के मर्म को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन प्रत्येक मनुष्य के लिए सेवा, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। आयोजन के समापन अवसर पर ऋतु शर्मा ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। महाआरती के पावन अवसर पर दयाल माहेश्वरी, सत्यनारायण माहेश्वरी, मुकुट शर्मा और ऋषभचंद जैन सहित शहर के गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित रहकर धर्म लाभ प्राप्त किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक एकता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक बनकर संपन्न हुआ।

Pratahkal Bureau
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