कोटा। इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन 2026 के तीसरे दिन शुक्रवार को परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते छात्रों के चेहरों पर थकान और चुनौती साफ नजर आई। देश की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में इस बार केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि छात्रों की मानसिक मजबूती और समय प्रबंधन के कौशल को भी तराशा जा रहा है। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड, कोटा के प्रसीडेंट विनोद कुमावत ने परीक्षा के सूक्ष्म विश्लेषण में बताया कि शुक्रवार की पहली पारी का पेपर न केवल कठिन था, बल्कि इसकी प्रकृति अत्यंत 'लेंदी' रही, जिसने मेधावी विद्यार्थियों को भी उलझाए रखा।

परीक्षा के धरातल पर जो स्थिति उभर कर आई, वह इस बात की ओर संकेत करती है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब सीधे सवालों के बजाय जटिल गणनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। विनोद कुमावत के अनुसार, पेपर का स्तर ओवरऑल कठिन रहा। विशेष रूप से केमिस्ट्री के खंड ने छात्रों को सबसे ज्यादा छकाया। आमतौर पर स्कोरिंग माना जाने वाला यह विषय इस बार गणनाओं के जाल में उलझा रहा। फिजिकल केमिस्ट्री में ऐसे प्रश्न देखने को मिले जहां एक सटीक उत्तर तक पहुँचने के लिए छात्रों को सभी विकल्पों की व्यक्तिगत रूप से गणना करनी पड़ी, जिससे समय का भारी अभाव महसूस हुआ। इनऑर्गेनिक में स्टेटमेंट सिलेक्शन और ऑर्गेनिक में गहरे वैचारिक प्रश्नों ने छात्रों की विषय पर पकड़ की कड़ी परीक्षा ली।

भौतिक विज्ञान यानी फिजिक्स का स्तर हालांकि मध्यम रहा, लेकिन यहाँ भी गणितीय गणनाओं की अधिकता ने छात्रों को राहत नहीं लेने दी। मैकेनिक्स, मैग्नेटिज्म और इलेक्ट्रोडायनेमिक्स जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स से अधिक संख्या में प्रश्न पूछे गए, जिनमें 11वीं कक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा 40 प्रतिशत और 12वीं का 60 प्रतिशत रहा। वहीं दूसरी ओर, गणित (मैथ्स) का पेपर तुलनात्मक रूप से संतुलित नजर आया। विनोद कुमावत ने विश्लेषण में स्पष्ट किया कि गणित में गणनाएं अपेक्षाकृत कम रहीं और इसमें अलजेब्रा व कैलकुलस का दबदबा रहा।

शिक्षा नगरी कोटा में इस विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट है कि जेईई-मेन की दौड़ अब केवल फॉर्मूले रटने तक सीमित नहीं रह गई है। जिस तरह से केमिस्ट्री और फिजिक्स के पेपर में 11वीं और 12वीं के पाठ्यक्रम का संतुलन (क्रमशः 40% और 60%) रखा गया, वह छात्रों के लिए एक बड़ा संकेत है। यह परीक्षा महज एक शैक्षणिक मूल्यांकन न होकर, दबाव की स्थिति में शांत रहकर सही निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण बन गई है। शुक्रवार की पहली पारी ने यह साबित कर दिया कि आने वाले सत्रों में वही छात्र बाजी मारेंगे जिनका टाइम मैनेजमेंट और मेंटल स्ट्रेन्थ अटूट होगी।

Pratahkal Bureau

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