लघु उद्योग भारती के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप केंद्र एवं राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग ने कोटा स्टोन उद्योग को ऑरेंज कैटेगरी से हटाकर ग्रीन कैटेगरी में शामिल कर लिया है। यह निर्णय कोटा स्टोन उद्योग से जुड़े हजारों लघु व्यापारियों और उद्यमियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

ऐतिहासिक सरलीकरण और नए नियम लघु उद्योग भारती के प्रयासों से पर्यावरण नियमों में ऐतिहासिक सरलीकरण किया गया है। इस परिवर्तन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  • ग्रीन कैटेगरी में शामिल होने के बाद अब कोटा स्टोन व्यापारियों को केवल एक बार पर्यावरण स्वीकृति प्रमाण-पत्र लेना होगा।
  • यह प्रमाण-पत्र आजीवन वैध रहेगा।
  • इस प्रमाण-पत्र की शुल्क राशि भी अत्यंत न्यूनतम रखी गई है।
  • यह व्यवस्था पांच करोड़ रुपये से कम लागत वाले उद्योगों पर लागू होगी।
प्रक्रिया में सुगमता और प्रशासनिक राहत सचिव संदीप जांगिड ने नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक जटिलताओं में कमी की जानकारी दी: "नई व्यवस्था के तहत अब व्यापारियों को चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाण-पत्र बनवाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।" पर्यावरण स्वीकृति के लिए प्रार्थना-पत्र (एप्लीकेशन) लगाने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह सरल कर दिया गया है। इसके लिए अब किसी मध्यस्थ या अतिरिक्त माध्यम की आवश्यकता नहीं होगी। प्रभावी तिथि और प्रभाव यह नया नियम 1 फरवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है, जिससे कोटा स्टोन उद्योग को प्रशासनिक जटिलताओं, समय और खर्च—तीनों से राहत मिलेगी। नेतृत्व का आभार लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अंकुर गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर अपने विचार साझा किए:

"ग्रीन कैटेगरी में शामिल होने के बाद अब कोटा स्टोन व्यापारियों को केवल एक बार पर्यावरण स्वीकृति प्रमाण-पत्र लेना होगा, जो आजीवन वैध रहेगा।"

कोटा ईकाइ के अध्यक्ष अंकुर गुप्ता ने इस उप​लब्धि का श्रेय लघु उद्योग भारती के शीर्ष नेतृत्व को देते हुए उनके प्रयासों को बधाई और साधुवाद ज्ञापित किया है।

Pratahkal Newsroom

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