कोटा राज्य का इतिहास पुस्तक पर सुवि आई हॉस्पिटल में संवाद कार्यक्रम संपन्न
इतिहासकार डॉ. मथुरा लाल शर्मा की कृति पर प्रबुद्धजनों ने किया विमर्श, भावी पीढ़ी को गौरवशाली अतीत से जोड़ने और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर दिया जोर।

कोटा के सुवि नेत्र चिकित्सालय में आयोजित 'प्रिव्यू एवं संवाद' कार्यक्रम के दौरान डॉ. मथुरा लाल शर्मा द्वारा रचित पुस्तक पर विचार व्यक्त करते अतिथि और प्रबुद्ध नागरिक।
कोटा। सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेजर सेंटर, तलवंडी, कोटा में दिनांक 26 फरवरी 2026 (गुरुवार) को “प्रिव्यू एवं संवाद” शीर्षक से एक गरिमामय साहित्यिक एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. मथुरा लाल शर्मा द्वारा रचित महत्वपूर्ण पुस्तक “कोटा राज्य का इतिहास” रहा। प्रो. (डॉ.) मथुरा लाल शर्मा की प्रोपोत्रियाँ डाॅ. मनीषा शर्मा एवं डाॅ. वागीशा शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पुस्तक का परिचय कराना नहीं, बल्कि कोटा की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत पर सार्थक विमर्श करना एवं नई पीढ़ी में इतिहास के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
चिकित्सा और संस्कृति का अनूठा संगम
सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेज़र सेन्टर कोटा के निदेश्क एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डाॅ. सुरेश पाण्डेय एवं डाॅ. विदुषी शर्मा ने बताया कि यह आयोजन चिकित्सा सेवा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं बौद्धिक चेतना के संवर्धन की दिशा में सुवि आई हॉस्पिटल की एक विशिष्ट पहल के रूप में आयोजित किया गया। संगोष्ठी कार्यक्रम में शहर के प्रख्यात साहित्यकारों, इतिहासकारों, शिक्षाविदों एवं प्रबुद्ध नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रबुद्धजनों की सहभागिता एवं विचार अभिव्यक्ति
इस अवसर पर प्रो. अरविन्द सक्सेना, इतिहासकार श्री फिरोज़ अहमद, समाजसेवी श्री शंकर आसकंदानी, अध्यक्ष कोटा व्यापार महासंघ श्री अशोक माहेश्वरी, प्रो. श्रीमती सुषमा आहुजा, प्रो. श्रीमती मनीषा शर्मा, समाजसेवी श्री जी. डी. पटेल, श्री डाॅ. प्रहलाद दुबे, डाॅ. नवनीत बागला, प्रो. अशोक गुप्ता, श्री ओमप्रकाश शर्मा, श्री विकास पण्डया डिप्टी डायरेक्टर ट्यूरिज्म, श्री राजेन्द्र सक्सेना आर्य समाज, श्री आर. एस. पालीवाल, श्री माधव शंकर याजनिक, डाॅ. नीलप्रभा नाहर, श्रद्धेय प्रभुजी (इस्काॅन टेम्पल), श्री संतोष शर्मा एवं नेत्र विशेषज्ञ डाॅ. एस. के. गुप्ता, रेटिना विशेषज्ञा डाॅ. निपुण बागरेचा सहित डॉ. मनीषा शर्मा, डाॅ. वागीशा शर्मा (अमेरिका), डाॅ. प्रमोद गुप्ता, प्रीशा गुप्ता, डॉ. सुरेश पाण्डेय एवं डॉ. विदुषी शर्मा ने अपने उदगार व्यक्त किये। सभी वक्ताओं ने कोटा की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने तथा युवाओं में अपने अतीत के प्रति गौरवबोध जागृत करने का आह्वान किया।
"कोटा राज्य का इतिहास": एक प्रामाणिक दस्तावेज
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि "“कोटा राज्य का इतिहास” कोटा की राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का एक प्रामाणिक एवं शोधपरक दस्तावेज है, जो अतीत को वर्तमान से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।" विशेषज्ञों ने बताया कि इस ग्रंथ में 17वीं शताब्दी में हाड़ा राजवंश द्वारा कोटा राज्य की स्थापना से लेकर आधुनिक काल तक की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का क्रमबद्ध एवं प्रमाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में शासकीय व्यवस्था, वीरता की गाथाएँ, प्रशासनिक संरचना, कोटा की विशिष्ट चित्रकला शैली, गढ़-पैलेस, राजमहलों की स्थापत्य कला तथा चंबल तट की सामरिक महत्ता का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
शोधार्थियों एवं युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि यह पुस्तक शोधार्थियों, इतिहास के विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है। इसमें उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्य, वंशावलियाँ एवं ऐतिहासिक दस्तावेज इसकी विश्वसनीयता को सुदृढ़ बनाते हैं। कार्यक्रम में डॉ. (स्व.) मथुरा लाल शर्मा के जीवन परिचय एवं उनके ऐतिहासिक शोध कार्यों पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने उन्हें राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत के सजग संवाहक के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि उनका लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
सामाजिक एवं सामूहिक स्मृति का आधार
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का विवरण नहीं होता, बल्कि वह समाज की सामूहिक स्मृति और पहचान का आधार होता है। “कोटा राज्य का इतिहास” जैसे ग्रंथ स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सुवि आई हॉस्पिटल, कोटा द्वारा इस प्रकार के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का मंच प्रदान करना समाज में सेवा, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना के समन्वय का प्रेरक उदाहरण है। चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए संस्था ने यह सिद्ध किया है कि समाज का समग्र विकास केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के संरक्षण से भी जुड़ा है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि कोटा की गौरवशाली ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित एवं प्रसारित करने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

Pratahkal Bureau
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