कोटा: नववर्ष की आध्यात्मिक भोर, तलवंडी दिगंबर जैन मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
कोटा के तलवंडी दिगंबर जैन मंदिर में नववर्ष 2026 का भव्य स्वागत। आर्यिका विशुद्ध मति माताजी के सान्निध्य में भगवान महावीर का प्रथम अभिषेक, जिन सहस्रनाम और वृहद शांतिधारा का आयोजन। गणधर वलय विधान में उमड़ी भक्तों की भीड़ और गुरु माँ का मिला विशेष आशीर्वाद। जानिए आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण इस धार्मिक उत्सव की पूरी रिपोर्ट।

कोटा। नवीन वर्ष 2026 के आगमन पर जब संपूर्ण विश्व उत्सव के उल्लास में डूबा था, तब शिक्षा नगरी कोटा का तलवंडी स्थित दिगंबर जैन मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के अनूठे संगम का साक्षी बना। भारत गौरव, सर्वाधिक दीक्षा प्रदात्री परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्रेष्ठ 105 श्री विशुद्ध मति माताजी एवं उनकी सुशिष्या प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 श्री विज्ञ मति माताजी के पावन सान्निध्य में आयोजित इन कार्यक्रमों ने नववर्ष को संयम और उपासना के रंग में सराबोर कर दिया। जिनेन्द्र प्रभु की अर्चना और गुरु माँ के मंगल आशीर्वाद के साथ शुरू हुए इस आयोजन ने श्रद्धालुओं के भीतर धर्म और शांति की नई चेतना जागृत की।
आयोजन की श्रृंखला का विवरण देते हुए महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि पूज्य आर्यिका संघ की उपस्थिति में संपूर्ण मंदिर परिसर संगीत और भक्तिमय भजनों से गुंजायमान रहा। श्रेष्ठि जनों द्वारा भगवान महावीर के समक्ष णमोकार महामंत्र का सामूहिक पाठ, 48 दीपकों के साथ भक्तामर जी का अनुष्ठान और गणधर वलय स्तोत्र का पाठ अत्यंत श्रद्धा भाव के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूज्य गुरु माँ ने दूर-दराज से आए भक्तों, महिलाओं और बच्चों को सुख-समृद्धि एवं निरोगी जीवन का मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
1 जनवरी 2026 की स्वर्णिम सुबह प्रातः 7 बजे मूलनायक भगवान महावीर के प्रथम अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुई। इस विशेष पुण्यार्जन का सौभाग्य महेंद्र-शुभम लुहाड़िया एवं राजेंद्र-राहुल बगड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। इसके उपरांत समाज के युवाओं और श्रेष्ठि जनों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक अभिषेक की क्रियाएं पूर्ण कीं। प्रचार मंत्री राजू लुहाड़िया के अनुसार, प्रातः 7:30 बजे पूज्य माताजी के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रों के बीच जिन सहस्रनाम अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा संपन्न हुई, जिसमें लगभग 80 प्रतिष्ठित परिवारों ने सहभागिता कर धर्म लाभ लिया। इसी दौरान रूपचंद जी नयापुरा एवं प्रकाश-सुनीता सामरिया परिवार द्वारा 1008 ऋद्धि मंत्रों के साथ अग्निकुंड में धूप क्षेपण कर वातावरण को सुगंधित और पवित्र बनाया गया।
शांतिधारा के पश्चात आयोजित 'गणधर वलय विधान' कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। इस विधान में सोधर्म इंद्र के रूप में अजय-उपेन्द्र परिवार ने सहभागिता की, जबकि यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य रूपचंद, विनय बंसल परिवार, महावीर बाकलीवाल, शांति लाल बाकलीवाल, श्रवण-सरोज बड़जात्या और राजीव जी भारती-सेठी परिवार को मिला। इस विधान को भैया जी श्री आदि कुमार, अनिल डाबी और अनिशा की संयुक्त टीम ने अपनी कुशलता और शास्त्रीय विधि-विधान से पूर्ण कराया। इस आध्यात्मिक महोत्सव के दौरान समाज के वरिष्ठ सदस्य जे.के. जैन, सुरेश जी चांदवाड़ और विमल जी वर्धमान की गरिमामय उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को द्विगुणित कर दिया।
आयोजन की सफलता में मंदिर समिति के पदाधिकारी राजेश बरमुंडा, मनोज पाटनी, युवा शक्ति से पिंकेश सांवला, शुभम लुहाड़िया, राजकुमार और महिला मंडल की सुनीता सामरिया सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने अपनी निष्काम सेवाएं अर्पित कीं। समिति अध्यक्ष अशोक पहाड़िया और कार्याध्यक्ष श्री जे. जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि नववर्ष के अवसर पर जिनेन्द्र प्रभु और गुरुजनों की अनुकम्पा प्राप्त करना समाज के लिए गौरव का विषय है।
अंत में, गणिनी आर्यिका 105 श्री विज्ञ मति माताजी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में गणधर वलय विधान की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 24 तीर्थंकरों के प्रमुख शिष्य गणधर देव होते हैं, जिनकी आराधना स्वयं इंद्र भी करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गणधर देवों की उपासना मात्र एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मकता का संचार करती है, जिससे आत्मिक गुणों का विकास होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यह आयोजन कोटा के जैन समाज के लिए न केवल धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि आत्मिक शुद्धि का एक महापर्व सिद्ध हुआ।

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