कोटा। आधुनिकता की अंधी दौड़ और प्रकृति से बढ़ती दूरी ने आज की युवा पीढ़ी को तनाव और अवसाद के भंवर में धकेल दिया है। इस गंभीर समस्या का एकमात्र समाधान प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित करना ही है। यह विचार राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर निमित आर. चौधरी ने स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित एक गरिमामयी विचार गोष्ठी में व्यक्त किए। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन एवं स्वामी विवेकानंद विचार संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कोटा की कर्णेश्वर हाउसिंग योजना में आयोजित इस कार्यक्रम में विचार मंथन के साथ-साथ वृक्षारोपण के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा की उपस्थिति में हुआ। आयोजन की गरिमा बढ़ाते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में आरटीयू के कुलगुरु प्रोफेसर निमित आर. चौधरी, राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय संरक्षक बसवराज पाटिल और राष्ट्रीय संगठन मंत्री एडवोकेट गिरिराज गुप्ता मंच पर आसीन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकीय महाविद्यालय, कोटा के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर बी.के. योगी ने की।

विधायक संदीप शर्मा ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय की पुकार है कि हम अपनी प्रकृति को बचाएं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस पवित्र उद्देश्य के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं को सरकार का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। वहीं, प्रोफेसर निमित आर. चौधरी ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति से संघर्ष ही वर्तमान निराशा का मूल कारण है। उन्होंने घोषणा की कि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर में सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण की विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी, ताकि छात्र किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति के महत्व को भी समझ सकें।

वैचारिक विमर्श को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय संरक्षक बसवराज पाटिल ने संगठन के मूल मंत्र को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की अवधारणा 'मानव-केंद्रित' न होकर 'प्रकृति-केंद्रित' होनी चाहिए। इसी ध्येय की प्राप्ति के लिए देशभर में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ-साथ दूषित नदियों की सफाई और रासायनिक खेती से मुक्ति के अभियान चलाए जा रहे हैं। अभियान की धरातलीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय संगठन मंत्री एडवोकेट गिरिराज गुप्ता ने बताया कि कर्णेश्वर हाउसिंग योजना को पूर्णतः हरा-भरा बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने साझा किया कि 90 प्रतिशत क्षेत्र में पौधारोपण संपन्न हो चुका है और शेष लक्ष्य को 'सेवा समर्पण सप्ताह' के तहत 18 जनवरी तक पूरा कर लिया जाएगा।

इस अवसर पर विजय सिंह पालीवाल, बृजेश विजयवर्गीय, धवल सिंघल, श्याम मनोहर हरित, दिवाकर जोशी, तेजराज सिंह, सी.एल. प्रजापति, सुरेश राठौड़, नारायण गौतम, गोपाल यादव, प्रमोद मीणा एवं मोहन सेन सहित शहर के अनेक पर्यावरण प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का कुशल संचालन कमलेश चौरसिया ने किया। अंत में, अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रोफेसर बी.के. योगी ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और समाज के हर वर्ग से पर्यावरण आंदोलन में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया। यह आयोजन न केवल एक वैचारिक गोष्ठी तक सीमित रहा, बल्कि इसने आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ और तनावमुक्त भविष्य की नींव रखने का संदेश भी दिया।

Pratahkal Bureau

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