कोटा में श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ त्रिदिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव, गूंजी जिनवाणी की महिमा
कोटा के तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में श्रुत पंचमी महोत्सव का भव्य समापन हुआ। मुनि निरोग सागर जी के सान्निध्य में श्रुत स्कंध विधान के साथ जिनवाणी के संरक्षण और ज्ञान आराधना का यह महापर्व कैसे बना आस्था का केंद्र?

कोटा के तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्रुत स्कंध विधान संपन्न करते श्रद्धालु।
कोटा के तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव का भव्य समापन शुक्रवार को हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की अपार आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां श्रुत स्कंध विधान एवं श्रुत पंचमी विधान के आयोजन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में समाजजन एकत्रित हुए और मंत्रोच्चार के बीच धर्मलाभ अर्जित किया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण, प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुई, जिसके उपरांत श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण और आत्मिक उन्नति की कामना करते हुए जिनेंद्र देव की आराधना की। विधान का कार्य विनोद भैय्या के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
इस पुनीत अवसर पर आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 निरोग सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 निर्मोह सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 निरामय सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 निर्भीक सागर जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 निरोग सागर जी महाराज ने श्रुत पंचमी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी का दिन जैन धर्म में ज्ञान साधना का महापर्व है, क्योंकि इसी दिन दिगम्बर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ ‘षट्खण्डागम’ को पुस्तकारूढ़ किया गया था। मुनि श्री ने स्मरण दिलाया कि आचार्य धरसेन स्वामी की प्रेरणा से आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली ने लुप्त होते ज्ञान को संरक्षित कर ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने कहा कि जिनवाणी ही सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र का मार्ग प्रशस्त करती है।
महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में अनेक परिवारों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। ध्वजारोहण का सौभाग्य वंदना बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ। श्रुत स्कंध विधान में सौधर्म इन्द्र के रूप में निहालचंद, कमला देवी, रोहित-चंदा, राहुल-सीमा, चैतन-रानू, वाणी, गोविंद, मनोज, मीथार्थ, मिताक्षी, क्यारा, रिया एवं गगन धनोप्या परिवार ने सेवाएँ दीं। द्रव्य पुण्यार्जक की भूमिका में भागचंद, देवेन्द्र, अमन एवं शोभित टोंग्या परिवार तथा शांतिलाल, सुमति प्रकाश, तारामणि चाँदवाड़ परिवार रहे। वहीं, कुबेर इन्द्र की भूमिका रामरतन-प्रेमवती, डॉ. अक्षय-डॉ. निधि, प्रजस एवं जिनित बरमुण्डा परिवार ने तथा माहेन्द्र इन्द्र की भूमिका ओ.पी. गुप्ता एवं रत्न प्रभा परिवार ने निभाई।
मंदिर समिति के अध्यक्ष अशोक पहाड़िया ने बताया कि कार्यक्रम का समापन आचार्य भक्ति और महाआरती के साथ हुआ, जिसमें समाज के वरिष्ठजनों, महिला मंडल और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर महामंत्री प्रकाश सामरिया, सकल समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, उपेन्द्र जैन, राजकुमार लुहाड़िया, संजय निर्वाण, अनिल जैन एवं अरविंद जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महोत्सव के माध्यम से समाज में जिनवाणी के प्रति गहरी श्रद्धा और ज्ञान की आराधना का जो संदेश प्रसारित हुआ, उसने सभी को आत्मिक उन्नति के प्रति प्रेरित किया।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
