कोटा/झालावाड़। राजस्थान के हाड़ौती अंचल और मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के गौभक्तों के लिए आस्था और भक्ति का एक ऐतिहासिक संगम होने जा रहा है। सरस्वती के वरद पुत्र और मालवा के सुप्रसिद्ध गौसेवक संत पूज्य पंडित कमल किशोर जी नागर के मुखारविंद से आगामी 15 से 21 जनवरी तक बकानी क्षेत्र के थोबड़िया खुर्द गांव में श्रीमद् भागवत कथा का विराट आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गौ-सेवा और सनातन संस्कृति के पुनरुद्धार का एक महामहोत्सव बनने जा रहा है। राजस्थान की धरा पर पूरे पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद और विशेष रूप से बकानी क्षेत्र में दो दशकों के इंतजार के बाद संत नागर जी का आगमन हो रहा है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में उत्सव और हर्षोल्लास का वातावरण व्याप्त है।

इस भव्य आयोजन की आधारशिला बुधवार, 7 जनवरी को कथा भूमि पर श्री गणेश और बजरंग बली के विधिवत पूजन के साथ रखी गई। कथा आयोजक और समर्पित गौसेवक मोहनलाल मदनलाल विश्वकर्मा ने बताया कि इस विराट आयोजन के लिए तैयारियाँ युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर दी गई हैं। लगभग 20 बीघा के विस्तृत क्षेत्र में एक भव्य कथा पांडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही सुचारू यातायात, व्यवस्थित पार्किंग, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आवास, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो।

भूमि पूजन के इस पावन अवसर के पश्चात अब निमंत्रण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हाड़ौती के प्रमुख शहरों यथा कोटा, मोड़क, चेचट, रामगंजमंडी, झालावाड़, झालरापाटन, भवानीमंडी, रायपुर, पिड़ावा, सुनेल, बकानी, अकलेरा, मनोहरथाना और असनावर सहित मालवा के राजगढ़, ब्यावरा, पचोर, खिलचीपुर, जीरापुर, माचलपुर और गागरोनी जैसे ग्रामीण अंचलों में 'पीले चावल' भेजकर भक्तों को सादर आमंत्रित किया जाएगा। बकानी के गौसेवक धनराज राठौर ने जानकारी दी कि पूज्य नागर जी की प्रेरणा का ही प्रभाव है कि आज हाड़ौती और मध्यप्रदेश में जनसहयोग से 222 गौशालाएं सफलतापूर्व संचालित हो रही हैं, जहाँ विशेष रूप से निशक्त और बीमार गौवंश की सेवा की जाती है।

संत कमल किशोर नागर जी का व्यक्तित्व केवल कथा वाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सामाजिक सुधार के प्रयासों ने एक बड़ी क्रांति को जन्म दिया है। उनकी प्रेरणा से गौभक्तों ने मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में भगवान राम और कृष्ण के भव्य मंदिरों का निर्माण कराया है। इन प्रयासों के फलस्वरूप आदिवासी समाज में सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था जागृत हुई है, जिसने धर्मांतरण जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 15 जनवरी से प्रारंभ होने वाली यह कथा आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ गौ-संरक्षण और सामाजिक एकता का एक नया अध्याय लिखेगी।

Pratahkal Bureau

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