कोटा, 15 जून। श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान एवं समस्त धाकड़ समाज के संयुक्त तत्वावधान में विनोबाभावे नगर स्थित श्री धरणीधर गार्डन में आयोजित नौ दिवसीय भव्य 'श्रीमद भागवत कथा महोत्सव' सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर पूर्णाहुति, हवन और विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन बनेठ वाले गुरुदेव के विदाई प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। 'बांके बिहारी लाल की जय' और 'धरणीधर भगवान की जय' के गगनभेदी जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।

कथा व्यास बनेठ वाले गुरुदेव ने ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हुए उपस्थित जनसमूह को जीवन की नश्वरता और भगवद् भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान की कृपा दृष्टि प्राप्त करने के लिए सत्संग, सेवा और भजन ही एकमात्र अचूक मार्ग हैं। उन्होंने गृहस्थ जीवन को नारायण के बिना नीरस बताते हुए आग्रह किया कि मनुष्य को सांसारिक उलझनों में फंसने के बजाय समय रहते गोविंद का नाम स्मरण करना चाहिए, क्योंकि भगवान की शरण ही जीव की मुक्ति का अंतिम द्वार है।

प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने समाज की विडंबनाओं पर कटाक्ष करते हुए मानव अहंकार को त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे भागवत कथा को केवल श्रवण न करें, बल्कि इसके महामंत्रों को अपने दैनिक आचरण में आत्मसात करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस घर में निरंतर भगवान का स्मरण होता है, वहां कभी दुखों का वास नहीं होता। कथा की पूर्णाहुति पर भव्य महाआरती और छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति एवं धाकड़ समाज के पदाधिकारियों ने गुरुदेव का अभिनंदन किया तथा सेवाभावी युवाओं एवं भामाशाहों को सम्मानित किया गया। यह धार्मिक अनुष्ठान समाज में सुख, समृद्धि और आपसी समरसता का संदेश प्रेषित कर संपन्न हुआ।

Pratahkal Newsroom

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