कोटा, 7 सितंबर। मेडिकल कॉलेज ग्राउंड में श्री राधा रमण भागवत आयोजन समिति के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का शुभारंभ भव्य कलशयात्रा के साथ हुआ। कथा के प्रथम दिन प्रसिद्ध कथा वाचक पं. श्री रवि गौतम, कंदाफल वाले ने रामायण के प्रसंग के माध्यम से त्याग, समर्पण और निष्काम भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “जो आनंद दास बनने में है, वह बदनाम (बड़ा नाम) होने में कहाँ है” और भगवान के चरणों में बैठने के बाद कोई पद शेष नहीं रहता है।

कथा के दौरान पं. श्री रवि गौतम ने रामायण के उस प्रसंग का वर्णन किया, जब भरत लाल जी अपने ननिहाल से अयोध्या लौटे और उन्हें पता चला कि उनकी माता कैकेयी के कारण श्री राम को 14 वर्ष का वनवास मिला है और महाराज दशरथ की मृत्यु हो गई है। इससे वे अत्यधिक क्रोधित और दुखी हुए तथा अपनी माता कैकेयी को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि उन्होंने पूरे कुल का नाश कर दिया है। भरत लाल जी ने कहा कि उन्हें अयोध्या का राजपद नहीं, बल्कि चरण पादुका चाहिए। इसके बाद उन्होंने दास बनकर नंदग्राम में रहकर 14 वर्षों तक केवल श्री राम की चरण-पादुकाओं की पूजा की।

पंडित जी ने कहा कि जो आनंद दास बनने में है, वह बदनाम (बड़ा नाम) होने में कहाँ है। हनुमान जी ने भी भगवान श्री राम के चरणों में अपने आप को भाग्यशाली माना है। उन्होंने कहा कि संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी पद की लालसा में लगा रहता है। कोई धन का पद चाहता है, कोई सत्ता का, कोई प्रतिष्ठा का तो कोई सम्मान का। लेकिन एक पद ऐसा है, जिस पर बैठने के बाद कोई पद बचता ही नहीं—वह है भगवान के चरणों का पद। भगवान के चरणों में स्थान मिल जाए तो उससे बड़ा सम्मान और कोई नहीं है। उन्होंने कहा, “हम तो श्रीराम के हैं, उनके गुलाम बने तो दुनिया भी गुलाम जैसी लगती है।”

कथा से पूर्व श्री राधा रमण भागवत आयोजन समिति के अध्यक्ष हरिओम गौतम के अनुसार, रंगबाड़ी बालाजी मंदिर से कलशयात्रा निकाली गई। बैंड बाजों और डीजे पर सुमधुर भजनों के बीच सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किए। गंगा जी के जयकारों के साथ शुरू हुई यह यात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई कथा स्थल पर पहुंची। जगह-जगह लोगों ने स्वागत द्वार लगाकर पुष्प वर्षा और आतिशबाजी के साथ कलशयात्रा का स्वागत किया।

कलशयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिवेश में शामिल हुईं। हजारों की संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर श्रद्धा और भक्ति के साथ यात्रा में भाग लिया। भजन और धार्मिक स्वर लहरियों के बीच निकली कलशयात्रा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा के कथा स्थल की ओर बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का भाव और अधिक दिखाई दिया। कथा स्थल पर कलशयात्रा पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और इसके साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। आयोजन के शुभारंभ अवसर पर धर्म और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कथा के दौरान बार-बार जय श्रीराम के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए। हरिओम गौतम ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा 13 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगी। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के चरणों में समर्पण, त्याग और निष्काम भक्ति का संदेश दिया जा रहा है।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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