कोटा: श्री धरणीधर गार्डन में भक्ति का सैलाब, गुरुदेव बोले- भाव से ही संभव है ईश्वर की प्राप्ति
श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान और धाकड़ समाज द्वारा आयोजित इस महोत्सव में पण्डित हरिओम शास्त्री ने भागवत कथा के महत्व और प्रभु शरणागति के संदेश को साझा किया।

कोटा के श्री धरणीधर गार्डन में आयोजित श्रीमद भागवत कथा एवं रासलीला महोत्सव के दौरान कथा श्रवण करते श्रद्धालु और भक्त।
कोटा के विनोबाभावे नगर स्थित खड़े गणेश जी रोड के श्री धरणीधर गार्डन में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान एवं समस्त धाकड़ समाज, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'श्रीमद भागवत कथा एवं रासलीला महोत्सव' के पांचवे दिन गुरुवार को पंडाल श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से खचाखच भर गया, जिससे पूरा परिसर धर्ममय हो उठा।
व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बनेठ वाले पण्डित हरिओम शास्त्री गुरूदेव ने धर्मोपदेश देते हुए कहा कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं और वे सदैव अपने भक्तों के सच्चे प्रेम और समर्पण को ही स्वीकार करते हैं। उन्होंने जीवन के वास्तविक लक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि मनुष्य का ध्येय मात्र अपना कल्याण करना नहीं, बल्कि प्रभु की शरणागति प्राप्त करना होना चाहिए, क्योंकि प्रभु की गोद में स्थान पा लेना ही मानव जीवन की परम सार्थकता है। गुरुदेव के मुखारविंद से प्रवाहित अमृतमयी कथा के दौरान उपस्थित भक्तगण पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर नजर आए।
महोत्सव के इस चरण में वृंदावन के प्रसिद्ध कलाकार हरिवल्लभ शर्मा 'छोटे ठाकुर' महाराज के निर्देशन में कलाकारों ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का अत्यंत मनोहारी मंचन प्रस्तुत किया। पांचवें दिन के प्रसंग में माखन चोरी की नटखट बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा का जीवंत प्रदर्शन किया गया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत माखन चोरी के सजीव दृश्यों ने पंडाल में उपस्थित सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तत्पश्चात, इंद्र के अहंकार को परास्त करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण करने की अलौकिक लीला प्रदर्शित की गई, जिसके उपरांत भव्य छप्पन भोग की झांकी सजाकर गोवर्धन महाराज की महाआरती संपन्न हुई।
संस्थान के कोषाध्यक्ष महावीर नागर अंथड़ा ने बताया कि यह आध्यात्मिक महोत्सव आगामी 13 जून तक अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों को आमंत्रित करते हुए जानकारी दी कि प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से अपराह्न 3 बजे तक श्रीमद भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है, जबकि रात्रि 7:30 बजे से दिव्य रासलीला का मंचन दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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