जवाहर नगर स्थित श्री राम मंदिर में आयोजित संगीतमय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक अभूतपूर्व एवं अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास परम पूज्य श्री शिव दास जी महाराज ने अपनी ओजस्वी एवं अमृतमयी वाणी से भगवान शिव की दिव्य महिमा का ऐसा भावपूर्ण व गहन वर्णन किया कि पंडाल में उपस्थित जनसैलाब शिव भक्ति के रस में पूरी तरह सराबोर हो गया। संगीतमय भजनों और शिव चरित्र के प्रसंगों के बीच पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से लगातार गुंजायमान रहा, जहाँ इस अलौकिक आध्यात्मिक प्रवाह का गवाह बनने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुँचे।

व्यासपीठ से महाराज श्री ने शिवलिंग की सर्वोच्च महिमा को रेखांकित करते हुए कहा कि शिवलिंग कोई साधारण पाषाण नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि, ब्रह्मांड और अनंत ऊर्जा का साक्षात विग्रह व प्रतीक है। इसकी निष्काम आराधना से मानव को परम मानसिक शांति, भौतिक सुख और उच्चतम आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। इसी क्रम में उन्होंने रुद्राक्ष के महत्व को प्रतिपादित करते हुए स्पष्ट किया कि रुद्राक्ष महादेव के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ है, जिसे धारण करने मात्र से मनुष्य पर भगवान शिव की विशेष और अनवरत कृपा बरसती है, साथ ही चारों ओर व्याप्त समस्त नकारात्मक शक्तियों से उसकी पूर्ण रक्षा होती है।

धार्मिक अनुष्ठान के इस पावन पड़ाव पर भस्म एवं त्रिपुंड धारण करने की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महिमा का भी विस्तार से विवेचन किया गया। महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भस्म और ललाट पर सजने वाला त्रिपुंड वैराग्य, आंतरिक पवित्रता और हमारी गौरवशाली सनातन संस्कृति की मूल पहचान हैं। इसके साथ ही, बेलपत्र को भगवान भोलेनाथ का अत्यंत प्रिय और अनिवार्य अंग बताते हुए उन्होंने कहा कि त्रिनेत्रधारी को पूर्ण श्रद्धाभाव से अर्पित किया गया एक भी बेलपत्र भक्तों की सदियों पुरानी मनोकामनाएं और मनोरथ तत्काल पूर्ण करने की क्षमता रखता है।

कथा के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए उन्होंने भगवान शिव के गणों और आयुधों, जैसे भांग, धतूरा, त्रिशूल और डमरू के आध्यात्मिक महत्व पर भी विशेष प्रकाश डाला। महाराज श्री ने संदेश दिया कि महादेव का त्रिशूल सृष्टि के तीन मूल स्तंभों— धर्म, अर्थ और कर्म का प्रतीक है, जो मनुष्य को मर्यादा का मार्ग दिखाता है, जबकि उनका डमरू इस संपूर्ण चराचर जगत के मूल नाद, आदि ध्वनि और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संवाहक माना जाता है। इसी दिव्य श्रृंखला में उन्होंने दूध से किए जाने वाले रुद्राभिषेक के चमत्कारी प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि इससे न केवल व्यक्तिगत कष्टों का निवारण होता है, बल्कि मानव जीवन में सुख, शांति, ऐश्वर्य और समृद्धि का स्थाई आगमन होता है।

इस भव्य धार्मिक समागम के दौरान वाल्मीकि समाज की सामाजिक व आध्यात्मिक भूमिका तथा ब्रह्मलोक से जुड़े गूढ़ एवं रहस्यमयी आध्यात्मिक प्रसंगों का भी अत्यंत सुंदर, मर्मस्पर्शी और सजीव वर्णन किया गया, जिसने श्रोताओं को आत्मविभोर कर दिया। आज के इस विशेष कथा प्रसंग एवं पूजा-अर्चना के मुख्य यजमान जवाहर नगर निवासी, प्रसिद्ध व्यवसायी 'सीमेंट वाले' हनुमान प्रसाद गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती आशा गुप्ता रहे। सौभाग्यशाली दंपती ने व्यासपीठ की गरिमा के अनुकूल पूर्ण विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और सात्विक नियमों का पालन करते हुए भगवान भोलेनाथ का सविधि पूजन संपन्न किया और लोक कल्याण की कामना के साथ पवित्र महा-रुद्राभिषेक अनुष्ठान को पूर्ण कर संपूर्ण क्षेत्र को शिवमय बना दिया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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