भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, यूजीसी विरोध के संदेश भी बने आकर्षण
कोटा में श्री पारीक पंचायत द्वारा आयोजित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धार्मिक झांकियों के साथ यूजीसी विरोध से जुड़े सामाजिक संदेश भी चर्चा में रहे। कार्यक्रम में ममता तिवाडी सहित कई गणमान्यजन मौजूद रहे।

तस्वीर में रथयात्रा के दौरान सजे हुए रथ पर एक व्यक्ति को साधु के वेश में बैठे हुए और पीछे एक अन्य रथ पर राधा-कृष्ण की वेशभूषा में बच्चों को देखा जा सकता है।
कोटा शहर में श्री पारीक पंचायत द्वारा आयोजित भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक संदेशों के संगम के रूप में संपन्न हुई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाएं भव्य रथ में विराजमान रहीं। "जय जगन्नाथ" के जयघोष, भजन-कीर्तन मंडलियों, ढोल-नगाड़ों, बैंड और संकीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ को खींचा। फूलों से सजे रथ, आकर्षक मार्ग सज्जा, जगह-जगह पुष्पवर्षा और स्वागत द्वारों ने पूरे आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
श्री पारीक पंचायत के अध्यक्ष रासबिहारी पारीक ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था और उत्साह के साथ भाग लिया तथा भगवान जगन्नाथ के जयकारों के बीच पूरे मार्ग में रथ खींचते रहे।
पंचायत के प्रवक्ता राहुल पारीक ने बताया कि पारीक पंचायत पिछले 19 वर्षों से निरंतर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन कर रही है। उन्होंने बताया कि समारोह में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवाडी मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
पंचायत के महामंत्री अशोक पारीक ने बताया कि समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. के.के. पारीक को क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट्स एंड डायबिटोलॉजिस्ट्स सोसायटी ऑफ इंडिया (CCDSI) के यूके चैप्टर का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर माला, शॉल और प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनका नागरिक अभिनंदन किया गया।
मुख्य अतिथि ममता तिवाडी ने कहा कि उन्हें समाज से अपनापन मिलता है और वह इसकी आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वह समाज की बेटी और बहन के रूप में सदैव साथ खड़ी रहेंगी। साथ ही उन्होंने अगले वर्ष किशोरपुरा से निकाली जाने वाली रथयात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
रथयात्रा में धार्मिक झांकियों के साथ सामाजिक संदेशों पर आधारित झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें भारत माता की एक झांकी प्रदर्शित की गई, जिसमें उन्हें बेड़ियों और जातिगत जंजीरों से जकड़े हुए दर्शाया गया। इसके अलावा कुछ बच्चों ने यूजीसी से संबंधित कानून के विरोध में लिखी तख्तियां हाथों में लेकर भाग लिया। इन तख्तियों पर "न जाति, न वर्ण, सारे भारतीय सवर्ण" सहित अन्य नारे अंकित थे।
कैलाश पारीक ने बताया कि रथयात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित रहे। लोगों ने भजन-कीर्तन के बीच रथ खींचने में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई श्रद्धालु पूरे मार्ग में नंगे पांव चलते रहे। महिला श्रद्धालु मंगल गीत गाती रहीं, जबकि विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां भी रथयात्रा की शोभा बढ़ाती रहीं। रथयात्रा का मुख्य आकर्षण नन्हे बालक-बालिकाएं रहे, जिन्होंने राधा-कृष्ण की वेशभूषा धारण कर यात्रा में भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने उन्हें पुरस्कृत भी किया।
महिला अध्यक्ष निर्मला पारीक ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का शुभारंभ सायं 6 बजे श्रीपुरा स्थित जगदीश मंदिर से हुआ। रथयात्रा श्रीपुरा मंदिर से बिड़ला मेडिकल, मोखापाडा, कैथूनीपोल पुलिस थाना, फर्नीचर मार्केट, लाल बुर्ज, गांधीजी की पुल, सुभाष सर्किल और टिप्पण चौकी होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। शोभायात्रा में श्रद्धालु परंपरागत वेशभूषा में शामिल हुए।
महामंत्री अनिता पारीक ने बताया कि रथयात्रा में बैंड, घोड़े, ऊंट गाड़ियां और बग्गियों पर राधा-कृष्ण तथा भगवान भोले विराजमान रहे। बटुक वेदपाठ करते हुए यात्रा का हिस्सा बने। जीवंत झांकियों के साथ महर्षि पाराशर की झांकी भी प्रस्तुत की गई। मंदिर परिसर पहुंचने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने महाआरती में भाग लिया।
महामंत्री अनिता पारीक ने बताया कि रथयात्रा से पूर्व श्रीपुरा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में दोपहर 2 बजे संकीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने ढोलक, मृदंग, ताल, हारमोनियम और तबला सहित विभिन्न वाद्य यंत्रों के साथ सामूहिक संकीर्तन किया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का मंगलाचार के साथ स्नान कराया गया, उन्हें नए वस्त्र पहनाए गए तथा फूलों से भव्य झांकी सजाई गई।
पूर्व अध्यक्ष रवि पारीक ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के श्रृंगार के लिए विशेष वस्त्र, आभूषण और अन्य सामग्री का उपयोग किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर विद्युत सज्जा से सुशोभित रहा।
कोषाध्यक्ष विनोद पारीक ने बताया कि रथयात्रा के प्रेरणा स्रोत स्व. प्रभु लाल जी दानजी वाले हैं। रथयात्रा में राजेंद्र गौतम, डॉ. अनिल शर्मा, अनिल तिवारी, कैलाश पारीक, रवि पारीक, विनोद पारीक, सीताराम पारीक, कमलेश पारीक, डॉ. श्रीपारीक, सत्यनारायण पारीक, शिव गोपाल पारीक, जय प्रकाश पारीक, रेवती रमन पारीक, गिरीराज पारीक, निर्मला पारीक, अनीता पारीक, प्रतीक्षा पारीक, रश्मि पारीक, रानी पारीक, देवेंद्र पारीक साबरमती, अशोक व्यास, विष्णु प्रसाद पारीक, रमेश शर्मा, लक्ष्मी कांत पारीक, महेश पारीक, मदन गोपाल पारीक, निलेश पारीक, पारीक, भूपेंद्र पारीक, कैलाश पारीक, दिनेश पारीक, राकेश, भुवनेश पारीक तथा योगेश पारीक (ढोटी वाले) सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सामाजिक संदेशों के साथ संपन्न हुई यह रथयात्रा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।

