कोटा सरस डेयरी की पहल: सरस चौराहे पर प्याऊ शुरू, पक्षियों के लिए बांधे परिंडे
कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ के नेतृत्व में भीषण गर्मी से राहत के लिए राहगीरों हेतु प्याऊ और पक्षियों के लिए परिंडे लगाए गए।

कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ परिसर में भीषण गर्मी के दौरान पक्षियों के लिए परिंडे में पानी भरते डेयरी अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ (पारंपरिक साफे में), प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा (राठौड़ के दाहिने हाथ की ओर बर्तन पकड़े हुए) और अन्य अधिकारीगण।
चिलचिलाती धूप और रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी के बीच कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (सरस डेयरी) ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। संघ परिसर में बेजुबान पक्षियों के लिए परिंडे बांधकर दाने-पानी की व्यवस्था की गई है, तो वहीं आम राहगीरों को तपती धूप में शीतलता प्रदान करने के लिए सरस चौराहे पर निशुल्क प्याऊ का भव्य उद्घाटन किया गया है।
कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ के नेतृत्व में आयोजित इस मानवीय और संवेदनशील कार्यक्रम में प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा सहित संघ के तमाम आला अधिकारी एवं कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ और प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा ने स्वयं अपने हाथों से संघ परिसर के विभिन्न हिस्सों में पक्षियों के लिए परिंडे बांधे और उसमें पानी भरा। इस अभियान को केवल एक दिन के औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए, अध्यक्ष राठौड़ ने मौके पर ही उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े निर्देश जारी किए कि सभी परिंडों में नियमित रूप से पानी भरा जाए ताकि इस भीषण गर्मी में किसी भी पक्षी को प्यासा न रहना पड़े और उन्हें कोई परेशानी न हो।
इस पुनीत कार्य के आधिकारिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए अध्यक्ष चैनसिंह राठौड़ ने कहा कि गर्मी के मौसम में प्राकृतिक जल स्रोतों के पूरी तरह सूख जाने से मूक पशु-पक्षियों के सामने जीवन और पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। उन्होंने समाज को प्रेरित करते हुए आह्वान किया कि ऐसे विकट समय में समाज के प्रत्येक व्यक्ति और हर संस्थान का यह परम दायित्व है कि वह जीवों के संरक्षण और मानव सेवा के कार्यों में आगे आकर अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए। राठौड़ ने दृढ़ता से कहा कि निस्वार्थ सेवा और संवेदनशीलता ही हमारी भारतीय संस्कृति की असली पहचान है, और इस तरह के निरंतर प्रयासों से समाज में मानवीय मूल्यों तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक जागरूकता बढ़ती है। सरस डेयरी द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल राहगीरों की प्यास बुझाएगा बल्कि पर्यावरण संतुलन में भी अपनी अहम भूमिका दर्ज कराएगा।

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