कोटा में आयोजित समता आंदोलन समिति के 19वें स्थापना दिवस समारोह में जातिगत आरक्षण, यूजीसी रेगुलेशन प्रावधान, पदोन्नति में आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ तीखे स्वर सुनाई दिए। हनुमंत वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में समता आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने कहा कि समता आंदोलन आरक्षण विरोधी नहीं, बल्कि जातिगत आरक्षण विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि “56 इंच के सीने वाले” जातिगत आरक्षण के मुद्दे पर मौन हैं और वर्तमान नीतियां समाज को अगड़े और पिछड़े वर्गों में बांटकर गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रही हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह राठौड़, प्रदेश महामंत्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, विधि प्रकोष्ठ प्रदेशाध्यक्ष ऋषिराज सिंह राठौड़ तथा अध्यक्षता कर रहे बाबा शैलेंद्र भार्गव द्वारा मां सरस्वती की तस्वीर पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस दौरान संभागीय अध्यक्ष डा. अनिल शर्मा, संयोजक राजेंद्र गौतम, संभागीय महामंत्री कमल सिंह और जिलाध्यक्ष गोपाल गर्ग मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री रास बिहारी पारीक ने किया।

महामंत्री रास बिहारी पारीक और कमलसिंह गहलोत ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत समता आंदोलन के सदस्य पूर्व न्यायाधीश पानाचंद जैन और वीरचक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह को श्रद्धांजलि देकर की गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने कहा कि देश में आरक्षण की आवश्यकता वास्तविक रूप से जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों को है, लेकिन प्रभावशाली और सम्पन्न लोग जाति के नाम पर दूसरों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। उन्होंने जातिगत आरक्षण में क्रीमीलेयर का प्रावधान लागू करने की मांग उठाते हुए कहा कि समता आंदोलन इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार यूजीसी रेगुलेशन प्रावधान को रोलबैक नहीं करती तो देशभर में हर मोर्चे पर विरोध जारी रहेगा।

उन्होंने राजस्थान में आरक्षण आधारित भर्तियों को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि संविधान के अनुसार किसी जाति विशेष को आरक्षण तभी दिया जा सकता है जब सरकारी सेवाओं में उसका प्रतिनिधित्व अपर्याप्त हो। उनका दावा था कि राजस्थान के अधिकांश सेवा संवर्गों में आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व पर्याप्त से अधिक हो चुका है, इसके बावजूद सरकार संवैधानिक और विधिक दायित्वों का पालन नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि राजस्थान में वर्तमान आरक्षण आधारित भर्तियां अवैध और असंवैधानिक हैं तथा किसी भी भर्ती में आरक्षण लागू नहीं किया जाना चाहिए।

प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह राठौड़ ने जाति आधारित जनगणना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें उपवर्गों को परिभाषित नहीं किया जा रहा, जिससे कई जातियां ओबीसी वर्ग में शामिल हो सकती हैं, जो वैधानिक रूप से उचित नहीं होगा।

संभागीय अध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा ने राजनीतिक दलों में टिकट वितरण के दौरान आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सीटों पर आरक्षण होने से योग्य व्यक्ति चुनाव लड़ने से वंचित हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरक्षण के कारण किसी प्रतिभा का हनन हुआ है तो उसका मुआवजा सरकार दे। साथ ही विधायक और सांसदों के लिए सलाहकार परिषद गठन की मांग करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों में परिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।

संभागीय संयोजक राजेंद्र गौतम ने कहा कि जातिगत आरक्षण का लाभ केवल पात्र व्यक्ति को मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्णयों का पालन नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के कारण एससी-एसटी वर्ग के वास्तविक जरूरतमंद लोग वंचित रह रहे हैं।

जिलाध्यक्ष गोपाल गर्ग ने कहा कि सम्पन्न एससी-एसटी वर्ग आरक्षण के अधिकांश लाभ ले जा रहा है, जिससे अन्य वर्गों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जातियों के बीच वर्ग संघर्ष की स्थिति बन रही है, जो भविष्य में गृह युद्ध जैसी परिस्थितियों को जन्म दे सकती है।

महामंत्री कमलसिंह ने स्वागत भाषण में 10 वर्षों के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई और कहा कि राजनीति ने देश को जाति के आधार पर विभाजित कर दिया है। प्रदेश महामंत्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि समता आंदोलन का संगठन देश के आठ राज्यों में सक्रिय है।

अध्यक्षता कर रहे बाबा शैलेंद्र भार्गव ने कहा कि जातिगत आरक्षण सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए लागू किया गया था, लेकिन आजादी के 75 वर्षों बाद भी व्यवस्था जारी रहना इसकी निष्पक्ष समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।

कार्यक्रम में समता आंदोलन समिति की प्रमुख मांगों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संभागीय अध्यक्ष अनिल शर्मा और संभागीय संयोजक राजेंद्र गौतम ने बताया कि समिति पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने, अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम निरस्त करने, यूजीसी रेगुलेशन प्रावधान वापस लेने, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन, आर्थिक आधार पर आरक्षण की समीक्षा, ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ सभी वर्गों तक बढ़ाने तथा जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर आंदोलन चला रही है।

समारोह में उठे मुद्दों और दिए गए बयानों ने आरक्षण व्यवस्था, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक प्रावधानों पर नई बहस को जन्म दे दिया है। समता आंदोलन समिति ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इन मुद्दों पर उसका आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Pratahkal Bureau

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