कोटा में 9 अगस्त भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर प्रबुद्ध शिक्षाविद एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी स्व. शंभू दयाल सक्सेना की स्मृति में उनकी सुपौत्र डॉ. अरुण प्रधान द्वारा रचित पुस्तक ‘सफलता के साधन’ का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम विज्ञान नगर स्थित आश्रय भवन, करणी नगर विकास समिति के सभागार में संपन्न हुआ।

स्व. शंभू दयाल जी सक्सेना के सुपौत्र एवं कार्यक्रम आयोजक डॉ. अरुण प्रधान, वरिष्ठ विशेषज्ञ, एसएमएस अस्पताल जयपुर, इंजीनियर तरुण प्रधान, वरिष्ठ अनुभव अभियंता रेलवे तथा पुत्रवधू श्रीमती सुशीला सक्सेना, सेवानिवृत्त अध्यापिका ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरिमोहन शर्मा, पूर्व आचार्य राजकीय महाविद्यालय कोटा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरपी गुप्ता, अध्यक्ष, जन शिक्षण संस्थान कौशल मंत्रालय नई दिल्ली ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुमन भंडारी, प्रवीण भंडारी, आश्रय करणी नगर विकास समिति कोटा, श्री बजरंग लाल जी, पूर्व प्राचार्य राजकीय एवं वाणिज्य महाविद्यालय कोटा, वीरेंद्र सक्सेना, वरिष्ठ अधिवक्ता राजस्थान उच्च न्यायालय एवं समाजसेवी अरुण भार्गव मौजूद रहे।

डॉ. अरुण प्रधान ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम स्वतंत्रता सेनानी स्व. शंभू दयाल जी सक्सेना के विचारों, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और राष्ट्रीय सेवा के मूल्यों को संजोने तथा आज की नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास है।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद स्वतंत्रता सेनानी शंभू दयाल जी सक्सेना के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। आयोजकों ने अतिथियों का माल्यार्पण कर एवं प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया।

मुख्य अतिथि हरि मोहन शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय शंभू दयाल जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और वे कोटा के गांधी कहलाए। आंदोलन के दौरान वे कई बार जेल भी गए। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी को जीवन में सफलता प्राप्त करने और सफलता के साधनों के बारे में समझाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री आरपी गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी शंभू दयाल जी सक्सेना ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ शिक्षा एवं सहकारिता के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने कोटा में हितकारी विद्यालय सहकारी शिक्षा समिति की स्थापना की। इसके साथ ही कोटा में सबसे पहले बीएड कॉलेज की स्थापना की, जो सभी वर्तमान में आज भी संचालित हैं।

श्री बजरंग लाल जी ने कहा कि शंभू दयाल जी सक्सेना कोटा नगर पालिका के प्रथम अध्यक्ष भी रहे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके द्वारा प्रजामंडल का गठन किया गया और प्रजामंडल के सदस्यों को साथ लेकर उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में कई संघर्ष किए।

समाजसेवी अरुण भार्गव ने शंभू दयाल जी सक्सेना के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब कोटा में महात्मा गांधी जी की अस्थियां लाई गई थीं और उन्हें चंबल में विसर्जित किया गया था, उस समय स्वतंत्रता सेनानी स्व. शंभू दयाल जी सक्सेना द्वारा छोटी समाज रामपुरा सिंघाड़ा घाट पर एक शिलालेख लगवाया गया था। उन्होंने इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग सरकार एवं जिला प्रशासन से की।

वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सक्सेना ने कहा कि शंभू दयाल जी सक्सेना स्वतंत्रता आंदोलन, शिक्षा और सहकारिता क्षेत्र के साथ-साथ समाज में भी सक्रिय रहे। वे कोटा कायस्थ समाज के अध्यक्ष भी रहे। उनका जीवन पूर्णतया संघर्षपूर्ण रहा।

कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता किरण सिंह ने किया। अंत में इंजीनियर तरुण प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा युवाशाखा प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत सक्सेना, समाजसेवी राजेंद्र सक्सेना, एडवोकेट विभा प्रधान सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, बुजुर्ग, युवा और महिलाओं ने भाग लिया।

भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में ‘सफलता के साधन’ पुस्तक के विमोचन के साथ स्वतंत्रता सेनानी स्व. शंभू दयाल जी सक्सेना के स्वतंत्रता आंदोलन, शिक्षा, सहकारिता और सामाजिक क्षेत्र में योगदान को याद किया गया।

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