कोटा: मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में गूंजी नए बाघ की दहाड़, पर्यटन को लगेंगे पंख
कोटा के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में रणथंभौर से नर बाघ टी-2408 को सफलतापूर्वक शिफ्ट किया गया है। भाजपा नेता पंकज मेहता ने इसे कोटा के पर्यटन विकास के लिए ऐतिहासिक बताया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों की सराहना की। जानें कैसे मुकंदरा में बाघों की बढ़ती संख्या वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय पर्यटन के लिए नई उम्मीदें लेकर आई है।

कोटा। राजस्थान की शिक्षा नगरी अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बनने की राह पर अग्रसर है। कोटा को पर्यटन नगरी के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करने के प्रयासों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (MHTR) में एक नए नर बाघ के आगमन से न केवल क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है, बल्कि स्थानीय पर्यटन में एक नई ऊर्जा का संचार होने की संभावना प्रबल हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पंकज मेहता ने इस घटनाक्रम पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि शुक्रवार का दिन मुकंदरा के संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय लेकर आया। रणथंभौर टाइगर रिजर्व की खंडार रेंज से नर बाघ टी-2408 (T-2408) को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज करने के पश्चात विशेष सुरक्षा के बीच मुकंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया है। इस स्थानांतरण के साथ ही मुकंदरा में बाघों का कुनबा अब और अधिक समृद्ध हो गया है। वर्तमान में इस रिजर्व में कुल पांच टाइगर मौजूद हैं, जिनमें तीन बाघिन, एक वयस्क बाघ और एक लगभग सात से आठ माह का शावक शामिल है।
पंकज मेहता ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का श्रेय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सतत मार्गदर्शन और अथक प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि बिरला के विजन और राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग के कारण ही यह चुनौतीपूर्ण स्थानांतरण संभव हो सका है। वन्यजीव विभाग और राज्य सरकार के सराहनीय प्रयासों की सराहना करते हुए मेहता ने रेखांकित किया कि मुकंदरा में बाघों की बढ़ती संख्या वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है।
यह कदम कोटा के आर्थिक और सामाजिक विकास की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यटकों की आवाजाही में भारी इजाफा होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कोटा एक प्रमुख 'वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन' के रूप में उभरेगा। मुकंदरा की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बाघों की दहाड़ अब कोटा के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है।

Pratahkal Bureau
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