कोटा। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित “विशुद्ध-विज्ञ रत्नत्रय ग्रन्थालय” में शुक्रवार को जैन धर्म की परम्परा के अनुरूप श्रद्धा-भक्ति के साथ संगीतमय माँ सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम परमपूज्या सिद्धान्तरत्न, भारत गौरव, सर्वाधिक दीक्षा प्रदात्री गुरुमाँ गणिनी आर्यिकाश्री 105 श्री विशुद्धमति माताजी एवं ब्रह्मविद्या वाचस्पति, प्रज्ञा पद्मिनी करुणामूर्ति पट्टगणिनी आर्यikारत्न 105 श्री विज्ञमति माताजी के ससंघ सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।

मंगल विहार और भव्य स्वागत

प्रातःकाल महावीर नगर प्रथम स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर (सफेद मंदिर) से गुरुमाँ का मंगल विहार बैण्ड बाजो के साथ होकर संघ ग्रन्थालय परिसर पहुँचा, मार्ग में महिलाएं कलश लेकर चल रही थी, जहाँ भक्तों ने विनय-भाव से उनका स्वागत किया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा पूज्य माताजी का पादप्रक्षालन एवं आरती सम्पन्न हुई तथा संगीतमय स्वर-लहरियों के बीच विधिवत सरस्वती पूजन किया गया। कार्यक्रम में अपने धार्मिक कार्यो के लिए भागचंद टोंग्या का विशेष सम्मान किया गया।

ज्ञान का अनूठा केंद्र: रत्नत्रय ग्रन्थालय

ग्रन्थालय के संरक्षक एवं प्रबंधक देवेन्द्र कुमार टोंग्या ने बताया कि वर्ष 2008 से संचालित इस ग्रन्थालय में पूज्य गुरुमाँ श्री विशुद्धमति माताजी द्वारा रचित आगम-आधारित पूजन, विधान एवं आराधना ग्रंथों का विशाल संग्रह उपलब्ध है। इन ग्रंथों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे जैन समाज में धर्मविधियों के स्वाधाय व अध्यापन को सहज बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि गुरुमाँ की आज्ञा से अब तक देशभर में लगभग पाँच लाख से अधिक धार्मिक पुस्तकों का प्रेषण किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में ग्रन्थालय में लगभग 75 हजार पुस्तकों का भंडार उपलब्ध है।

पूज्य माताजी के मंगल प्रवचन

इस अवसर पर अपने मंगल प्रवचन में गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी ने देव-शास्त्र-गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि — "सम्यक श्रद्धा से की गई आराधना आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।" वहीं पट्टगणिनी आर्यिका श्री विज्ञमति माताजी ने सम्यक दृष्टि, सम्यक विचार और आगमाधारित जीवनशैली को जैन धर्म का मूल तत्व बताते हुए धर्माध्ययन एवं साहित्य साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।

पुण्यार्जक परिवार एवं गणमान्य उपस्थिति

गुरुमाँ के पादप्रक्षालन एवं आरती का सौभाग्य भागचंद जैन, देवेन्द्र-उर्मिला जैन, अमन-किरण जैन, शोभित जैन तथा समस्त टोंग्या परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन सकल जैन समाज के कार्याध्यक्ष जे.के. जैन ने किया, जबकि मंगलाचरण किरण टोंग्या ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में परम संरक्षक विमल जैन (नांता), सकल जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्यध्यक्ष जे के जैन, महामंत्री पदम बड़ला, धर्मचंद काला, ताराचंद बडला, ज्ञानचंद झांझरी, संदीप जैन, गुलाबचंद लुहाडिया, मिलाप अजमेरा, प्रदीप जैन, जीवनधर जैन, महेश सेठी, प्रकाश सामरिया सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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