जे.के. लोन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की निरंतर होती मौतों ने कोटा शहर के जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर विषय पर बीती रात एक और प्रसूता की मृत्यु के पश्चात उपजा जनाक्रोश 11 मई, सोमवार सुबह उस समय चरम पर पहुँच गया जब शहर जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष राखी गौतम मृतक के परिजनों संग मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गईं। आंदोलन के दूसरे दिन मंगलवार दोपहर 3 बजे हरकत में आई सरकार द्वारा भेजी गई प्रतिनिधि चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़ ने संभागीय आयुक्त कार्यालय में वार्ता हेतु राखी गौतम व पीड़ित परिवारों के मुखियाओं को आमंत्रित किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में राखी गौतम के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में पीपल्दा विधायक चेतन पटेल, विधायक सीएल प्रेमी, पूर्व लाडपुरा प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू, देहात अध्यक्ष भानूप्रताप सिंह और पीसीसी महासचिव अमित धारीवाल सहित पीड़ित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। प्रशासन की ओर से संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और एसपी सिटी तेजस्वनी गौतम उपस्थित रहे।

वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराकर मौतों के असली कारणों को उजागर करना, दोषी चिकित्सकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना तथा मृतक परिवारों को 50 लाख एवं अन्य पीड़ित परिवारों को 20 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करना शामिल था। सरकार व प्रशासन द्वारा इन मांगों पर ठोस एवं प्रमाणित आश्वासन दिए जाने के उपरांत प्रशासन की ओर से भेजे गए एडीएम सिटी अनिल सिंघल ने धरना स्थल पर पहुँचकर समस्त शर्तें स्वीकार कीं, जिसके बाद राखी गौतम ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।

इस अवसर पर राखी गौतम ने इसे सत्य और न्याय की विजय बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने गरीब पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया है और वे भविष्य में भी उनके साथ खड़ी रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एडीएम सिटी अनिल सिंघल ने धरना स्थल पर स्वयं पहुँचकर 50 लाख और 20 लाख रुपये के मुआवजे पर विचार कर निर्णय लेने का पूर्ण आश्वासन दिया है, जिसके बाद ही सशर्त धरना समाप्त किया गया है। महासचिव डॉ. विजय सोनी ने जानकारी दी कि मंगलवार को भी धरना स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आमजन का तांता लगा रहा। उन्होंने वार्ता को पूर्णतः सफल एवं सौहार्दपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा तीनों प्रमुख मांगें मान ली गई हैं, जो पीड़ित परिवारों के संघर्ष की बड़ी जीत है।

Pratahkal Bureau

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