कोटा को हर वर्ष आने वाली बाढ़ से मुक्त बनाने और जन-धन की हानि रोकने की मांग को लेकर तालाब बचाओ संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से हस्तक्षेप की अपील की है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष मनोज दुबे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शहर के सभी तालाबों और जलाशयों से अतिक्रमण हटाने तथा उनकी पूर्ण रूप से सफाई कराने की मांग उठाई है।

मनोज दुबे ने तालाबों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण और मिट्टी भराव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सोगरिया सहित सभी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) किसानों, पशुपालकों और गरीबों को उजाड़ने पर आमादा है, लेकिन सोगरिया तालाब पर केडीए द्वारा नोटिस जारी किए जाने के 13 माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी तालाब से अतिक्रमण हटाने में विफल रहा है।

उन्होंने केडीए पर अतिक्रमण हटाने में भेदभाव और मनमानी करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सोगरिया सहित सभी तालाबों से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो केडीए एवं संभागीय आयुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। मनोज दुबे ने कहा कि मानसून आने वाला है, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन कुम्भकर्णी नींद में सो रहा है। बाढ़ से जन-धन की हानि रोकने के लिए तालाबों और सभी जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाना तथा उनकी सफाई कराना अत्यंत आवश्यक है।

मनोज दुबे ने कहा कि सरकार सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से सभी जलाशयों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का रिकॉर्ड संधारित करे तथा उसी के अनुरूप जलाशयों को संरक्षित कर सभी जल स्रोतों को उनके मूल स्वरूप में लाया जाए, ताकि जल संरक्षण के साथ-साथ बाढ़ से भी प्रभावी बचाव सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने बताया कि सोगरिया तालाब पर अतिक्रमण के विरोध में तालाब बचाओ संघर्ष समिति द्वारा केडीए को लिखित शिकायत दी गई थी। इस शिकायत पर केडीए ने 23 मई 2025 को अतिक्रमण करने वालों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद आज तक सोगरिया तालाब से अतिक्रमण नहीं हटाया गया। उनका कहना है कि इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बढ़ रहे हैं और भूमाफिया तालाब में मिट्टी डालकर उसका भराव कर अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं।

मनोज दुबे ने कहा कि सोगरिया तालाब के साथ-साथ अन्य सभी तालाबों में भी भराव और अतिक्रमण पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, ताकि जलाशयों का मूल स्वरूप सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि तालाब जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत हैं और जल संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इनका संरक्षण अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि एक ओर देश के विभिन्न क्षेत्रों में आज भी लाखों लोग एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तालाबों, नदियों, कुओं और बावड़ियों की सफाई के अभाव तथा अतिक्रमण के कारण वर्षा जल व्यर्थ बह जाता है, जो जल संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ी बाधा है।

मनोज दुबे ने मांग की कि बरसात से पहले गांव-गांव और शहरों में सभी तालाबों, कुओं, बावड़ियों और जोहड़ों जैसे जल स्रोतों की पूर्ण रूप से सफाई कराई जाए तथा उन पर हो रहे अतिक्रमणों को हटाकर भविष्य में ऐसे अतिक्रमणों पर कड़ी रोक लगाई जाए, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण हो सके। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जल एवं पर्यावरण संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों की सफाई के अभाव तथा लगातार हो रहे अतिक्रमण और मिट्टी भराव जल संरक्षण में सबसे बड़ी रुकावट बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि तालाबों, जोहड़ों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ बनाने, वर्षा जल का अधिकतम संग्रहण सुनिश्चित करने तथा उनके रखरखाव और स्वच्छता के लिए व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाकर उन्हें अतिक्रमण मुक्त किया जाना आवश्यक है। इससे एक ओर वर्षा जल का संरक्षण होगा, वहीं शहर और ग्रामीण क्षेत्र बाढ़ मुक्त बन सकेंगे तथा हर वर्ष बरसात के दौरान होने वाली जन-धन की हानि पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

Pratahkal Bureau

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