कोटा पिप्पलेश्वर महादेव मंदिर में अष्टम् प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव
महावीर नगर में त्रिदिवसीय पाटोत्सव के दौरान रक्तदान शिविर, सहस्रघट महाभिषेक और आरूषी गम्भीर की भजन संध्या समेत विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।

राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा के महावीर नगर तृतीय, रंगबाड़ी रोड़ स्थित कम्पीटीशन कॉलोनी में आस्था का सैलाब उमड़ने को तैयार है। यहाँ प्रतिष्ठित भगवान श्री पिप्पलेश्वर महादेव मन्दिर के पाटोत्सव-2026 के पावन अवसर पर त्रिदिवसीय अष्टम् प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव का भव्य एवं विराट आयोजन किया जा रहा है। भगवान श्री पिप्पलेश्वर महादेव सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस गरिमामयी महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों की भी अनूठी झलक देखने को मिलेगी, जिसमें रक्तदान, सहस्रघट महाभिषेक, भजन संध्या एवं विशाल भण्डारे जैसे कार्यक्रमों का सुनियोजित समायोजन किया गया है।
समिति के अध्यक्ष भारत भूषण ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह त्रिदिवसीय वार्षिक महामहोत्सव 20 अप्रैल, सोमवार से भक्तिभाव के साथ प्रारंभ होगा और 22 अप्रैल, बुधवार को विधि-विधान के साथ सम्पन्न होगा। महोत्सव के विषय में जानकारी देते हुए महामंत्री जागेश्वर पाल गौड़ ने कहा कि तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का सुंदर समावेश किया गया है। आयोजन के प्रथम दिन, 20 अप्रैल को प्रातः 9 बजे से पिप्पलेश्वर वाटिका स्थित मंदिर प्रांगण में एक वृहद रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जो मानवता की सेवा के प्रति समिति के संकल्प को दर्शाता है।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण 21 अप्रैल को आयोजित होने वाला सहस्रघट महाभिषेक होगा। प्रातः 8 बजे से प्रारंभ होने वाले इस अनुष्ठान में भगवान भूतनाथ की विशेष कृपा से श्रद्धालु वर्ष में केवल एक बार होने वाले अतिदुर्लभ और दर्शनीय 1008 जलधाराओं से सम्पन्न महाभिषेक के दिव्य दर्शन कर सकेंगे। इसी क्रम में 21 अप्रैल की रात्रि 8 बजे एक भव्य भजन संध्या का आयोजन सुनिश्चित किया गया है, जिसमें नई दिल्ली की सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री आरुषी गम्भीर अपनी सुमधुर आवाज में मनमोहक भजनों की सरिता बहाएंगी। महोत्सव के अंतिम दिन, 22 अप्रैल 2026 (वैशाख शुक्ल पंचमी) को सायं 4 बजे से एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तजन शामिल होकर महाप्रसाद ग्रहण करेंगे। यह महामहोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामूहिक सहभागिता और भक्ति के अटूट विश्वास का प्रतीक बनकर उभरेगा।

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