कोटा भगवान परशुराम प्राकट्य महोत्सव पर आज निकलेगी भव्य शोभायात्रा
बाबा शैलेन्द्र भार्गव के सानिध्य में तलवंडी से शुरू होने वाली इस यात्रा में झांकियां, अखाड़े और यूजीसी कानून विरोधी प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहेंगे।

राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में आराध्य देव भगवान परशुराम का प्राकट्य महोत्सव संभागभर में अपार श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम संयोजक बाबा शैलेन्द्र भार्गव (गोदावरी धाम) के अनुसार, इस पावन अवसर पर ब्राह्मण समाज द्वारा शहर के विभिन्न अंचलों में विविध आयोजन किए जाएंगे, जिसका मुख्य आकर्षण 18 अप्रैल को निकलने वाली भव्य ऐतिहासिक शोभायात्रा होगी। इस शोभायात्रा का विधिवत शुभारंभ तलवंडी स्थित परशुराम सर्किल पर विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ होगा। यह वैभवशाली यात्रा सेन्ट्रल पब्लिक स्कूल, केशवपुरा मेन रोड, महावीर नगर तृतीय चौराहा और घटोत्कच सर्किल से होते हुए महर्षि गौतम सामुदायिक भवन के समक्ष से गुजरेगी और अंततः बालाजी मार्केट स्थित परशुराम वाटिका पहुंचकर एक विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो जाएगी।
शोभायात्रा के समापन पर संतों के दिव्य आशीर्वचन होंगे और शंख ध्वनि के बीच 151 दीपों से भगवान परशुराम की महाआरती उतारी जाएगी। इस दौरान भव्य आतिशबाजी और कथक नृत्य गुरु बरखा जोशी के निर्देशन में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी, जिसके पश्चात भामाशाहों का सम्मान और महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा। इस गरिमामय आयोजन में अयोध्या से श्री रामलला सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री, लखनऊ से क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के प्रपौत्र अमित आजाद, पूर्व आईजी लक्ष्मण गौड़, टोंक के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य त्रिकालदर्शी राजकुमार शर्मा, मोटे महादेव के संत दशरथ दास महाराज, स्टेशन के भरत महाराज, झालीपुरा के सियाराम महाराज और कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा सहित कई गणमान्य विभूतियां सम्मिलित होंगी।
शोभायात्रा की भव्यता का वर्णन करते हुए प्रवक्ता रमेश चन्द्र गौतम ने बताया कि इसमें विभिन्न देवी-देवताओं और महापुरुषों की झांकियां सजी होंगी, जिनमें राधा-कृष्ण की नृत्य नाटिका, रामदरबार, ब्राह्मण ऋषियों, भगवान गणेश, और भगवान परशुराम की विशेष झांकी शामिल है। इसके अतिरिक्त डोरेमोन सेट-सेठानी की झांकी, झालावाड़ की प्रसिद्ध बिंदोरी, उज्जैन के ढोल-ताशे और झांझ, फाग चंग पार्टी, अखाड़े, कच्ची घोड़ी और भजन मंडलियां वातावरण को भक्तिमय बनाएंगी। विशेष रूप से बटुक मंत्रोच्चार के साथ हवन करते हुए चलेंगे, जो त्रेता और द्वापर युग की उस शिक्षा पद्धति को जीवंत करेंगे जो भगवान राम और कृष्ण ने वेद विद्यालयों में प्राप्त की थी। समसामयिक विषयों को जोड़ते हुए यूजीसी कानून के विरोध में तैयार की गई झांकी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण रहेगी। यात्रा में 3 बैंड, 4 डीजे, बग्गियों में सवार संत और अग्रिम पंक्ति में केसरिया ध्वज थामे घुड़सवार शामिल होंगे। हजारों की संख्या में पुरुष भगवा या सफेद कुर्ता-पजामा और धोती में, जबकि मातृशक्ति पीली या मांगलिक साड़ियों में भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए जयघोष करेंगे।
इस महोत्सव के माध्यम से समाज की शक्ति और एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा। बाबा शैलेन्द्र भार्गव ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज के सभी संगठन इस आयोजन में सम्मिलित होकर अपनी एकता का परिचय देंगे। वहीं, "सशक्त नारी, सशक्त समाज" का संदेश देते हुए लगभग 5000 महिलाएं सिर पर पगड़ी, हाथ में परसा लिए और पीली साड़ी धारण कर अपनी गौरवशाली उपस्थिति दर्ज कराएंगी, जो आधुनिक समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतीक होगा। व्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों ने विशेष सतर्कता बरती है; भोजन की शुद्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ "उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में" के संकल्प के साथ लोगों को अन्न की बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों में रामस्वरूप शर्मा, राजेंद्र गौतम, अनिल तिवारी, प्रदीप दाधीच, ईश्वर शर्मा, विशाल शर्मा, किशन पाठक, धर्मेंद्र दीक्षित, जगमोहन गौतम, ब्रजराज गौतम, लोकपाल जगदीश शर्मा, अरुण भार्गव, बबलू शर्मा, नवीन शर्मा, नंदकिशोर दलाल, श्याम बिहारी शर्मा, आकाश भार्गव, नेमीचंद शर्मा, अनिल शर्मा, कपिल शर्मा और दीपक शर्मा सहित समस्त समाज बंधु तत्परता से जुटे हुए हैं।

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