भीषण गर्मी और 43 डिग्री तापमान की परवाह किए बिना आज कोटा की सड़कों पर हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आमजन न्याय की मांग को लेकर उतरे। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और चरमराई चिकित्सा व्यवस्थाओं के खिलाफ पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में यह विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। सुबह 10:00 बजे से ही कार्यकर्ता कोटिया भील की प्रतिमा के पास जुटना शुरू हुए और 11:00 बजे हजारों की संख्या में एक रैली के रूप में न्यू मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां यह प्रदर्शन एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया।

सभा को संबोधित करते हुए कोटा प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने तीखे प्रहार करते हुए कहा कि बीते 4 तारीख से सरकार की नाकामियों के कारण कोटा के सरकारी अस्पताल में 'मौत का तांडव' जारी है। उन्होंने वर्तमान सरकार को 'पर्ची सरकार' करार देते हुए आरोप लगाया कि गरीब और ग्रामीण लोग अपने परिजनों को बचाने की उम्मीद में अस्पताल आते हैं, लेकिन यह संस्थान उनकी कब्रगाह बनते जा रहे हैं। भारद्वाज ने यह भी कहा कि कोटा के प्रभावशाली नेता सच्चाई को दबाने और पूरे प्रकरण पर लीपापोती करने का प्रयास कर रहे हैं।

पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भावुक और आक्रामक स्वर में कार्यकर्ताओं से कहा कि कोटा एक भीषण त्रासदी का गवाह बन रहा है। उन्होंने कहा कि उन माताओं ने अपने नवजात शिशुओं की शक्ल तक नहीं देखी और संसार से विदा हो गईं। अब उन बच्चों के जन्मदिन पर ही उनकी मां की पुण्यतिथि मनाई जाएगी, जो एक हृदयविदारक विडंबना है। गुंजल ने कहा कि डर के मारे लोग वार्डों से भाग रहे हैं और सरकारी चिकित्सा तंत्र से जनता का विश्वास पूरी तरह उठ चुका है, जो सरकार के चेहरे पर काला धब्बा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के भीतर मृतकाओं के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और दवा माफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, तो प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा कर कोटा में इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

गुंजल ने प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जैसे ही कांग्रेस ने धरने को शक्ति देने का निर्णय लिया, दो दिनों से अकड़ दिखाने वाला प्रशासन घुटनों पर आ गया और आनन-फानन में मांगे मानने की 'नौटंकी' की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि परिजनों को डरा-धमकाकर धरना समाप्त कराने का प्रयास किया गया। गुंजल ने खुलासा किया कि अस्पताल प्रशासन ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह डॉक्टरों की लापरवाही नहीं बल्कि दवाओं का रिएक्शन है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला गलत दवाओं के इस्तेमाल का है, तो संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और प्रिंसिपल चिकित्सकों को निलंबित या बर्खास्त कर असली दवा माफियाओं को क्यों बचा रहे हैं?

उन्होंने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और सत्तासीन रसूखदारों पर निशाना साधते हुए कहा कि RMS से NOC लेकर पिछले कुछ महीनों में करीब 25 करोड़ रुपये की दवाओं की सीधी सप्लाई की गई है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भी हमला बोलते हुए कहा कि उनका काम अब केवल अखबारों में फोटो छपवाने तक सीमित रह गया है और वे अधिकारियों पर दबाव बनाकर गुनाहों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। गुंजल ने स्पष्ट किया कि यदि समझौते की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो वे कलेक्ट्रेट जाम कर देंगे और सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।

प्रदर्शन के पश्चात भारद्वाज और गुंजल ने अस्पताल के भीतर जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। जब पीड़ित रागिनी मीणा के पति ने बताया कि अस्पताल प्रशासन उन्हें जबरन छुट्टी दे रहा है, तब गुंजल ने तुरंत एसडीएम से बात कर निर्देश दिए कि बिना मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के किसी भी मरीज को डिस्चार्ज न किया जाए। इस प्रदर्शन को पूर्व जिला अध्यक्ष रविंद्र त्यागी, एस सी मोर्चा प्रदेश महासचिव डीके मेघवाल, क्रांति तिवारी, अनूप ठाकुर, बूंदी जिला अध्यक्ष महावीर मीणा, मनोज दुबे ने भी संबोधित किया, जबकि संचालन हेमंत चतुर्वेदी और धन्यवाद ज्ञापन महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष शालिनी गौतम ने किया। इस दौरान मंजूर तंवर, टीकम चंद सुमन, दीपक नामदेव, दिलदार अली, महेश श्रृंगी, नसरुद्दीन, बलविंदर सिंह, मंजू चौधरी, इसरार अहमद, लोकेश गुंजल और हिमांशु शर्मा सहित हजारों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau

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