कोटा: भीमेश्वर महादेव मंदिर में गूंजा 'नन्द घर आनन्द भयो', राघव ऋषि ने कहा- 'पवित्र मन में ही होता है प्रभु का वास'
कोटा के भीमेश्वर महादेव मंदिर में राघव ऋषि जी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन नन्द महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूज्य ऋषि जी ने पूतना वध के आध्यात्मिक अर्थ और मन की पवित्रता पर प्रकाश डाला। विधायक संदीप शर्मा सहित कई गणमान्य लोगों ने व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया। जानिए कथा के दिव्य प्रसंग और आगामी श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव की पूरी जानकारी।

कोटा। गणेश नगर स्थित भीमेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। श्रीराम कृष्ण कथा ज्योतिष समिति कोटा के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आध्यात्मिक चेतना जगाते हुए पूज्य राघव ऋषि जी महाराज ने जीवन के गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठाया। कथा के दौरान जैसे ही नन्द महोत्सव का शुभारंभ हुआ, संपूर्ण पाण्डाल मानों साक्षात गोकुल धाम में परिवर्तित हो गया। पुष्पवृष्टि और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने बालकृष्ण के जन्मोत्सव का दिव्य आनंद प्राप्त किया। ऋषि जी ने 'नन्द' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि नन्द वही है जो सबको आनंद प्रदान करे और मानव जन्म की सार्थकता भी दूसरों को खुशियां बांटने में ही निहित है।
कथा के मधुर प्रसंगों के बीच जब पूज्य ऋषि जी के सुपुत्र सौरभ ऋषि जी ने "नन्द घर आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की" भजन का गायन किया, तो भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि उपस्थित सभी श्रोता अपनी सुध-बुध खोकर नृत्य करने लगे। इस मंगल अवसर पर सभी भक्तों को माखन का प्रसाद वितरित किया गया। पूज्य राघव ऋषि जी ने इंद्रियों और भक्ति के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो भक्त अपनी प्रत्येक इंद्रिय से प्रभु रस का पान करता है, वही वास्तविक गोपी है। उन्होंने समाज को सचेत करते हुए कहा कि मनुष्य शरीर की तुलना में मन से अधिक पाप करता है। यदि जीव स्वयं को 'नन्द' स्वरूप बना ले और अपने शरीर को मथुरा तथा हृदय को गोकुल के समान पवित्र कर ले, तो उसे ईश्वर की कृपा प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता।
पूतना वध के प्रसंग का आध्यात्मिक विश्लेषण करते हुए महाराज श्री ने बताया कि 'पूत+ना' अर्थात जो पवित्र नहीं है, वही पूतना है। अज्ञानता ही अपवित्रता की जननी है। यदि किसी व्यक्ति के पास संसार का समस्त ज्ञान है लेकिन उसे ईश्वर का बोध नहीं है, तो उसका जीवन अपवित्र माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसकी बाहरी आकृति तो सुंदर है किंतु कृति (कर्म) बुरी है और जिसका हृदय विष से भरा है, वही पूतना का आधुनिक स्वरूप है। जीव अक्सर तर्क-कुतर्क के माध्यम से ईश्वर पर कटाक्ष करता है, परंतु भगवान करुणासागर हैं, वे ऐसे जीवों का भी उद्धार कर उन्हें सद्गति प्रदान करते हैं।
इस पावन अवसर पर कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा एवं पूर्व विधायक पूनम गोयल ने कथा स्थल पहुंचकर व्यास पीठ का पूजन किया और पूज्य ऋषि जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य पोथी पूजन एवं व्यास पूजन का सौभाग्य नितेश जैन, नवनीत गुप्ता, विमलेश गौतम, शशि तिवारी, सत्यनारायण शर्मा और धर्मेन्द्र झा को प्राप्त हुआ। भक्ति और सेवा के इस संगम में प्रातः काल से ही रबीन्द्र सदन स्थित ऋषि कुटिया में निःशुल्क ज्योतिष परामर्श शिविर का आयोजन किया गया, जहां क्षेत्रवासियों ने अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। वहीं, सायं काल में महालक्ष्मी आराधना के अंतर्गत भगवती के मण्डप प्रवेश का पूजन संपन्न हुआ।
महोत्सव की भव्य आरती में समिति के समर्पित सदस्य बसंतलाल शर्मा, कुलदीप भट्ट, हरिकृष्ण त्रिवेदी, तेजपाल वर्मा, धवल मिश्र, राजेन्द्र गुप्ता, जगदीश शर्मा, मनोज गुप्ता, सत्यनारायण खण्डेलवाल, राकेश सरोजा, सुशील चौरसिया, भारतेश विजयवर्गीय, श्यामसुंदर शर्मा, हेमराज जांगीड़, विनोद शर्मा, मोहनस्वरूप मिश्र, लेखराज राठौड़, चंद्रप्रकाश गौतम और रामविलास शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिरकत की। प्रचार सचिव रामेश्वर गुप्ता ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया जाएगा, जिसमें धूमधाम से भगवान की बारात निकाली जाएगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन गया है, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागृति का केंद्र भी बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau
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